Wednesday, July 15, 2026
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जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत: नगर आयुक्त उमेश भारती

32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 को लेकर शिक्षकों की जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित

मधुबनी, 15 जुलाई। 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के तहत जिला स्तरीय श्रोत व्यक्ति सह परामर्शी दिशा-निर्देशन कार्यशाला का आयोजन बुधवार को रीजनल सेकेंडरी स्कूल, मधुबनी में किया गया। कार्यशाला का मुख्य विषय “निरंतरता के लिए विज्ञान एवं नवाचार” रहा, जिसमें जिले के विभिन्न विद्यालयों के विज्ञान शिक्षकों ने भाग लेकर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने पर मंथन किया।

कार्यशाला का उद्घाटन नगर आयुक्त उमेश भारती, राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के राज्य संरक्षक एवं रीजनल सेकेंडरी स्कूल के निदेशक डॉ. आर. एस. पाण्डेय, शैक्षणिक समन्वयक सह प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार झा, प्रो. कुंवर जी राउत, इंजीनियर प्रत्यूष परिमल तथा सीताराम यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर नगर आयुक्त उमेश भारती ने कहा कि बढ़ती आबादी और बदलते पर्यावरणीय हालात को देखते हुए जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुके हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यालयों में बच्चों को जल संरक्षण, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक करें। उन्होंने वर्षा जल संचयन और सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग पर भी विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीपीओ (माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता) आनंद वर्मा ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों का केवल पाठ्यक्रम पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका कॉन्सेप्ट स्पष्ट करना और उनमें जिज्ञासा विकसित करना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करें और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करें। उन्होंने एनसीईआरटी की प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा (Project Based Learning) की सराहना करते हुए इसे प्रभावी शिक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।


राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के राज्य संरक्षक डॉ. आर. एस. पाण्डेय ने कहा कि जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे विषयों पर विद्यार्थी नवीन वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन कर सकते हैं। इसके लिए शिक्षकों की सक्रिय भूमिका अत्यंत आवश्यक है।
प्रो. कुंवर जी राउत ने विज्ञान में नवाचार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वैज्ञानिक सोच ही समाज को नई दिशा देती है। वहीं शैक्षणिक समन्वयक सह प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार झा ने कहा कि नवाचार आधारित परियोजनाओं से विद्यार्थियों की प्रतिभा निखरेगी और उन्हें नई पहचान मिलेगी। इंजीनियर प्रत्यूष परिमल ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के माध्यम से ही देश और समाज का सतत विकास संभव है।
कार्यशाला में सीताराम यादव, रविंद्र झा तथा राज्य पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक एवं मध्य विद्यालय महथा के प्रधानाध्यापक प्रेमनाथ गोसाईं ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के मुख्य विषय एवं विभिन्न उप-विषयों पर विस्तार से जानकारी दी और परियोजना निर्माण की प्रक्रिया से शिक्षकों को अवगत कराया।

कार्यक्रम में कलुआही के प्रभारी सीओ योगेंद्र कुमार, जिला समन्वयक डॉ. एस. एन. ठाकुर, उत्क्रमित उच्च विद्यालय महमदपुर के प्रधानाध्यापक रमाकर झा, उच्च विद्यालय जफरा बिस्फी के शिक्षक शुभचंद्र झा, महाराजपुर हाई स्कूल के अजीत झा, जितेंद्र गिरी, सुभाष झा, पवन तिवारी, राजीव कुमार, अमित शाही, राजा राम झा, पंकज झा, सुमित चौधरी, रौशन कुमार, अविनाश कुमार, गुड़िया झा समेत जिले के बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के लिए शिक्षकों को विषय चयन, परियोजना निर्माण और विद्यार्थियों का प्रभावी मार्गदर्शन करने के लिए प्रशिक्षित करना था, ताकि जिले से अधिकाधिक गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक परियोजनाएं राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकें।

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