मधुबनी, 6 अगस्त। प्रशासनिक संवेदनशीलता और वन्यजीव संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण मधुबनी में देखने को मिला। देर रात ऑफिसर्स कॉलोनी स्थित सरकारी आवास के समीप एक कछुआ भटककर पहुंच गया। इसकी जानकारी मिलते ही वरीय उपसमाहर्ता ने बिना समय गंवाए उसके सुरक्षित रेस्क्यू की व्यवस्था कर वन विभाग को सूचना दी।
कछुए को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे, इसके लिए उसे बेहद सावधानी से सुरक्षित स्थान पर रखा गया। इसके बाद वन परिसर पदाधिकारी अनूप कुमार से तत्काल संपर्क किया गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम रात में ही मौके पर पहुंची और कछुए को अपने संरक्षण में लेकर आवश्यक देखभाल शुरू की।
अगले दिन वन विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत डीपीओ नमामि गंगे आनंद अंकित की उपस्थिति में कछुए को उसके प्राकृतिक आवास जीवछ नदी में सुरक्षित छोड़ दिया। नदी में पहुंचते ही कछुआ सहज रूप से अपने प्राकृतिक परिवेश में लौट गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए प्रकृति संरक्षण का जीवंत संदेश बन गया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कछुए जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने, जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि कोई कछुआ भटककर आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच जाए तो सड़क दुर्घटना, आवारा पशुओं या मानवीय गतिविधियों से उसके जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है। ऐसे में उसका सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राकृतिक आवास में छोड़ना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वरीय उपसमाहर्ता की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की। लोगों ने कहा कि प्रशासन की यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी नैतिक दायित्व है।

वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्र में दिखाई दे तो उसे स्वयं पकड़ने या कहीं और ले जाने का प्रयास न करें। इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे उसके प्राकृतिक आवास में पहुंचा सके।
“प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि हमारी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भी परिचायक है। एक छोटी-सी सजगता किसी बेजुबान जीव का जीवन बचा सकती है।”
