Thursday, August 6, 2026
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बिहार में न्याय व्यवस्था को मिलेगा डिजिटल आधार, पूरे राज्य में लागू होगी ‘न्याय श्रुति’ प्रणाली, 968 थानों में CCTNS से हो रहा काम

पटना: बिहार सरकार न्यायिक और पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में गृह विभाग के सचिव कुंदन कुमार की अध्यक्षता में न्याय श्रुति प्रणाली (Nyaya Shruti System) एवं अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (Crime and Criminal Tracking Network & Systems – CCTNS) की अद्यतन स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों परियोजनाओं की प्रगति, चुनौतियों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि बिहार के 968 थानों में CCTNS प्रणाली सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से एफआईआर का ऑनलाइन पंजीकरण, केस डायरी का डिजिटल संधारण, आरोपियों का रिकॉर्ड, समय पर चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया, ई-साक्ष्य (e-Evidence) अपलोड करने और मामलों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इससे पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और मामलों के निष्पादन में तेजी आई है।

बैठक के दौरान लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी थानों में समय पर चार्जशीट दाखिल करने, डिजिटल रिकॉर्ड को अद्यतन रखने और ई-साक्ष्य अपलोड करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करने और समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी विशेष बल दिया गया।
बैठक का एक प्रमुख विषय ‘न्याय श्रुति प्रणाली’ रहा। अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस प्रणाली का सफल वीडियो ट्रायल पूरा हो चुका है तथा पटना उच्च न्यायालय द्वारा इसे Go-Live Certificate भी प्रदान कर दिया गया है। इसके बाद अब इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से पूरे बिहार में लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
न्याय श्रुति प्रणाली लागू होने के बाद न्यायिक प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग होगा। इससे न्यायालयों, पुलिस, अभियोजन, कारा प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान अधिक तेज और सुरक्षित होगा। इसके अलावा वीडियो ट्रायल, डिजिटल दस्तावेजों के प्रबंधन और मामलों की निगरानी जैसी प्रक्रियाएं भी अधिक प्रभावी बनेंगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब कम होने की उम्मीद है।

बैठक में अभियोजन निदेशालय, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL), समाज कल्याण विभाग, कारा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), बेल्ट्रॉन (BELTRON) तथा अन्य संबंधित विभागों और एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

गृह विभाग का मानना है कि CCTNS और न्याय श्रुति प्रणाली के पूर्ण क्रियान्वयन से बिहार की न्याय व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, तेज और तकनीक-संचालित बनेगी। इससे अपराध अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार होगा, मामलों के शीघ्र निष्पादन में मदद मिलेगी तथा आम नागरिकों को न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और प्रभावी होगी।

राज्य सरकार इन दोनों परियोजनाओं को बिहार में ई-गवर्नेंस और डिजिटल न्याय व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही है। आने वाले समय में इन प्रणालियों के माध्यम से पुलिस, न्यायालय और अन्य सरकारी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है, जिससे कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।

 

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