डीएम आनंद शर्मा ने कहा—शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए प्रशासन के साथ अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की सहभागिता जरूरी
मधुबनी, 20 सितंबर 2026। जिले की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, डिजिटल और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में जिला प्रशासन की ओर से व्यापक स्तर पर पहल की जा रही है। ‘मिशन कायाकल्प मधुबनी’ के तहत सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक प्रयोगशाला और अन्य तकनीकी संसाधनों को विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने यह बातें प्राइवेट स्कूल एवं चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन, मधुबनी के तत्वावधान में आयोजित शिक्षाविद सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही।
डीएम ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की मजबूत नींव शिक्षा से तैयार होती है। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, संस्कार, अनुशासन, विचार और भविष्य को आकार देने का महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से शिक्षा के प्रति जागरूक होकर दूसरों को भी प्रेरित करने की अपील की।
‘मिशन कायाकल्प मधुबनी’ से स्कूलों का होगा व्यापक विकास
जिलाधिकारी ने कहा कि ‘मिशन कायाकल्प मधुबनी’ का उद्देश्य केवल विद्यालयों के भवन और भौतिक संसाधनों में सुधार करना नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य और जिले की पूरी शिक्षा व्यवस्था का कायाकल्प करना है।
इसके तहत विद्यालयों की वर्तमान स्थिति और जरूरतों के आधार पर उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में चिन्हित कर आवश्यकतानुसार कार्ययोजना तैयार की गई है। इससे प्रत्येक विद्यालय में उसकी वास्तविक जरूरत के अनुरूप संसाधनों का विकास किया जा सकेगा।
तीन श्रेणियों में बांटे गए विद्यालय
पहली श्रेणी: ऐसे विद्यालयों को इसमें शामिल किया गया है, जहां आधारभूत संरचना की स्थिति गंभीर या क्रिटिकल है। इन विद्यालयों में भवन निर्माण और आवश्यक बुनियादी संरचनाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
दूसरी श्रेणी: इस श्रेणी में वैसे विद्यालय शामिल हैं, जहां विद्यार्थियों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां बच्चों के बैठने की व्यवस्था, पेयजल, पंखा, शौचालय सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं को बेहतर करने की दिशा में काम किया जाएगा।
तीसरी श्रेणी: इस श्रेणी में उन विद्यालयों को रखा गया है, जहां आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों के विकास की संभावनाएं हैं। ऐसे विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, ऑनलाइन क्लास, आधुनिक प्रयोगशाला सहित तकनीक आधारित शिक्षण सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
शिक्षकों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
डीएम आनंद शर्मा ने शिक्षकों की भूमिका को समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने शिक्षकों को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने तथा विद्यालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आज के बच्चे ही कल देश का भविष्य होंगे। इसलिए उन्हें बेहतर शिक्षा, संस्कार, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
डीएम ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियां बच्चों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें आधुनिक तकनीक और डिजिटल संसाधनों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
‘आपका विद्यालय, आपका स्वाभिमान’ अभियान पर भी जोर
जिलाधिकारी ने ‘आपका विद्यालय, आपका स्वाभिमान’ के तहत किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल सरकारी संस्थान नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव केवल प्रशासन के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए शिक्षकों की कर्तव्यपरायणता, अभिभावकों की जागरूकता, जनप्रतिनिधियों के सहयोग और समाज की सक्रिय सहभागिता जरूरी है।
अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील
डीएम ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि और जागरूकता पैदा करें। बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के साथ उनकी पढ़ाई, उपस्थिति और शैक्षणिक प्रगति पर भी नजर रखें।
उन्होंने कहा कि जब प्रशासन की पहल के साथ शिक्षक की जिम्मेदारी, अभिभावकों की जागरूकता और समाज की सहभागिता जुड़ेगी, तभी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और स्थायी बदलाव संभव होगा।
शिक्षकों और शिक्षाविदों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों और शिक्षाविदों का सम्मान उनके योगदान के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है। इससे अन्य लोगों को भी शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम में अनुमंडल पदाधिकारी सदर चंदन कुमार झा, उपनिदेशक सह जिला जनसंपर्क पदाधिकारी प्रमोद कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी योजना एवं लेखा, विद्यालय संघ के अध्यक्ष देवानंद झा सहित जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
जिले की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में पहल
‘मिशन कायाकल्प मधुबनी’ के माध्यम से प्रशासन का फोकस विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं से लेकर आधुनिक डिजिटल शिक्षा तक है। यदि योजना के तहत निर्धारित कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
