Friday, May 29, 2026
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कबीर जयंती पर शिक्षकों की आवाज बुलंद “सुबह साढ़े 6 बजे स्कूल पहुंचना शिक्षकों के लिए जानलेवा” — ब्रह्मदेव यादव

मधुबनी में कबीरदास जयंती के अवसर पर आयोजित बैठक में शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने बिहार सरकार की शिक्षा व्यवस्था एवं हालिया आदेशों पर गंभीर चिंता जताई। कार्यक्रम में प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन मधुबनी के उपाध्यक्ष एवं दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के भावी प्रत्याशी ब्रह्मदेव यादव ने कहा कि सुबह साढ़े छह बजे विद्यालय पहुंचने की अनिवार्यता शिक्षकों के लिए “जानलेवा व्यवस्था” बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि वर्षों से कबीरदास जयंती पर शिक्षकों को अवकाश मिलता रहा है, लेकिन हाल के दिनों में सरकार द्वारा इस छुट्टी को समाप्त कर दिया गया, जिससे शिक्षकों में नाराजगी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कबीर जयंती पर पूर्व की तरह राज्यीय अवकाश बहाल किया जाए।

ब्रह्मदेव यादव ने कहा कि अप्रैल महीने से लागू प्रातःकालीन विद्यालय व्यवस्था और ऑनलाइन सेल्फी अटेंडेंस की बाध्यता ने शिक्षकों पर भारी दबाव बना दिया है। सुबह जल्दी स्कूल पहुंचने की जल्दबाजी में लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि अप्रैल और मई महीने में केवल मधुबनी जिले में आधा दर्जन से अधिक शिक्षक दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं।

उन्होंने Pandaul प्रखंड के विद्यालय की एक दर्दनाक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक शिक्षिका को विद्यालय पहुंचाने जा रहे उनके पति की सड़क दुर्घटना में मौके पर ही मौत हो गई, जबकि शिक्षिका गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि वर्तमान व्यवस्था शिक्षकों की सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो रही है।

बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि शिक्षकों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए जिला शिक्षा विभाग से अनुमति नहीं मिल रही है। वक्ताओं ने इसे शिक्षकों की मौलिक स्वतंत्रता का हनन बताया।

ब्रह्मदेव यादव ने कहा कि “तनावग्रस्त शिक्षक कभी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे सकते। अगर सरकार सच में शिक्षा सुधार चाहती है तो पहले शिक्षकों को सम्मान और सुरक्षित वातावरण देना होगा।”

बैठक में सरकार से मांग की गई कि
कबीरदास जयंती पर अवकाश बहाल किया जाए,
प्रातःकालीन विद्यालय का समय सुबह 7 बजे से किया जाए,
जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को शिक्षण कार्य से मुक्त किया जाए,
तथा शिक्षकों को उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने की स्वतंत्रता दी जाए।

कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पहले शिक्षकों की समस्याओं का समाधान जरूरी है।

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