डीएम आनंद शर्मा की सख्त कार्रवाई, कहा अनुशासनहीनता और कर्तव्यहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
मधुबनी | 29 मई 2026
मधुबनी जिला प्रशासन ने सरकारी सेवाओं में अनुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए बेनीपट्टी प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित निलंबित लिपिक दिनेश कुमार झा को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी आनंद शर्मा द्वारा विभागीय जांच में आरोपों के पूर्ण रूप से प्रमाणित पाए जाने के बाद बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के तहत की गई।
जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संबंधित लिपिक पर लंबे समय से गंभीर अनियमितताओं और अनुशासनहीनता के आरोप लग रहे थे। विभागीय जांच में यह सामने आया कि वे बार-बार बिना अनुमति कार्यालय से अनुपस्थित रहते थे, जिससे सरकारी कार्य प्रभावित हो रहे थे। इसके अलावा न्यायालय से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों के रख-रखाव में भी भारी लापरवाही बरती गई।
जांच में यह भी पाया गया कि संवेदनशील और गोपनीय सूचनाओं को अनधिकृत व्यक्तियों तक पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप भी सही पाए गए। प्रशासनिक स्तर पर इसे कार्यालयीन गोपनीयता और सरकारी सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया है।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि विभागीय कार्यवाही के दौरान संबंधित कर्मी को कई बार अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का अवसर प्रदान किया गया, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। उपलब्ध दस्तावेजों, जांच प्रतिवेदन और साक्ष्यों के आधार पर आरोप पूरी तरह प्रमाणित होने के बाद जिलाधिकारी ने कठोर दंडादेश पारित करते हुए सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।
सूत्रों के अनुसार, यह पहला मामला नहीं था। संबंधित कर्मी के खिलाफ पूर्व में भी कई विभागीय कार्यवाहियां चल चुकी थीं और अलग-अलग मामलों में दंड भी अधिरोपित किया गया था। इसके बावजूद उनके कार्य व्यवहार और आचरण में कोई अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया।
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सरकारी सेवकों से उच्च स्तर की जवाबदेही, अनुशासन और नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती है। सरकारी कार्यों में लापरवाही, कर्तव्यहीनता, स्वेच्छाचारिता या गोपनीय दस्तावेजों के दुरुपयोग को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की “शून्य सहिष्णुता नीति” के तहत आगे भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और कार्य संस्कृति को मजबूत किया जा सके।
इस कार्रवाई को प्रशासनिक हलकों में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे सरकारी कर्मियों के बीच अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूती मिलेगी।
