दरभंगा | बिहार
दरभंगा जिले में कोचिंग से लौट रही नाबालिग छात्रा के साथ हुई दुष्कर्म की घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज, व्यवस्था और हमारी सामूहिक जिम्मेदारियों पर बड़ा सवाल है। यह घटना छात्रा के घर से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई, जो बताती है कि खतरा अब दूर नहीं, बल्कि बेहद करीब है।
पीड़िता रोज की तरह पढ़ाई कर घर लौट रही थी। परिजनों ने उसे बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ पढ़ने भेजा था, लेकिन रास्ते में उसके साथ जो हुआ, उसने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया। यह घटना साफ संदेश देती है कि बेटियों को पढ़ाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देना।
समाज को यह समझने की जरूरत है कि बेटियों को पढ़ने के लिए भेजते समय उनके आने-जाने के समय, रास्ते और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए। स्कूल, कोचिंग और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए, ताकि बेटियां सही समय पर जाएं और सही समय पर सुरक्षित घर लौटें।
यह भी जरूरी है कि अभिभावक बच्चों को जागरूक करें—
अजनबियों से दूरी, किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत मदद मांगना और भरोसेमंद लोगों से संपर्क बनाए रखना सिखाएं। वहीं प्रशासन की जिम्मेदारी है कि शिक्षण संस्थानों के आसपास गश्त बढ़ाई जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाए।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि किताबों की शिक्षा के साथ-साथ जीवन की सुरक्षा की शिक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। जब तक समाज, परिवार और प्रशासन मिलकर जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती।
अब समय आ गया है कि हम सिर्फ अपराध पर दुख न जताएं, बल्कि संकल्प लें—
बेटियां पढ़ें भी, बढ़ें भी और सुरक्षित भी रहें।
