Patna News: राजधानी पटना में आवासीय मकानों में बिना अनुमति दुकान, ऑफिस या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों की अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। पटना नगर निगम ने ऐसे मकान मालिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम की जांच में 26,745 आवासीय संपत्तियां ऐसी चिन्हित की गई हैं, जहां आवासीय परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां चलने की बात सामने आई है।
इस कार्रवाई की सबसे बड़ी चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि पटना की मेयर सीता साहू के आवास को लेकर भी नगर निगम ने नोटिस जारी किया है। अजीमाबाद अंचल की टीम ने बड़ी पटन देवी गली, महाराजगंज स्थित परिसर पर नोटिस चस्पा किया है। नोटिस में मेयर के साथ उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी शामिल हैं।
मेयर सीता साहू के घर भी पहुंचा नोटिस
नगर निगम की ओर से जारी नोटिस में संबंधित पक्ष से निर्धारित समय के भीतर लिखित जवाब और जरूरी दस्तावेज देने को कहा गया है। अजीमाबाद अंचल की ओर से मेयर और उनके परिवार से जुड़े लोगों को 24 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
निगम ने साफ कहा है कि यदि तय समय में संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज नहीं दिए गए तो उपलब्ध रिकॉर्ड और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
26,745 मकानों की जांच, अब शुरू होगी सुनवाई
पटना नगर निगम ने शहर के सभी छह अंचलों में आवासीय संपत्तियों का सर्वे कराया है। इस सर्वे के बाद 26,745 मामलों की सूची तैयार की गई है।
अब इन मामलों में संबंधित मकान मालिकों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। 19 अगस्त से 10 सितंबर तक अंचलवार सुनवाई होगी।
अगर सुनवाई के दौरान मकान मालिक यह साबित कर देते हैं कि संपत्ति का इस्तेमाल नियमों के मुताबिक हो रहा है या उनके पास जरूरी अनुमति मौजूद है, तो उन्हें राहत मिल सकती है। वहीं संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर निगम सख्त कार्रवाई कर सकता है।
पटना के इन इलाकों में मिले सबसे ज्यादा मामले
नगर निगम के सर्वे में पटना के कई प्रमुख इलाकों में आवासीय मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं।
इनमें मुसल्लहपुर, बाजार समिति, कंकड़बाग, एसकेपुरी, गुलजारबाग, महाराजगंज, एजी कॉलोनी, पाटलिपुत्र कॉलोनी, कृष्णापुरी, लोदीपुर, आशियाना, विजय नगर, मंदिरी, दीदारगंज, गुरुगोविंद सिंह पथ, हरमंदिर गली और मारूफगंज समेत कई इलाके शामिल हैं।
किस अंचल में कितने मामले?
नगर निगम की सूची के मुताबिक अलग-अलग अंचलों में मामलों की संख्या इस प्रकार बताई गई है—
बांकीपुर अंचल: करीब 7 हजार मामले
कंकड़बाग अंचल: करीब 6 हजार मामले
पाटलिपुत्र अंचल: करीब 6 हजार मामले
अजीमाबाद अंचल: करीब 3,400 मामले
पटना सिटी अंचल: करीब 3 हजार मामले
नूतन राजधानी अंचल: करीब 2,800 मामले
यानी सबसे ज्यादा मामले बांकीपुर अंचल में सामने आए हैं।
घर-घर जाकर किया गया सत्यापन
नगर निगम ने पहले प्रॉपर्टी आईडी और सेल्फ असेसमेंट के आधार पर संभावित संपत्तियों की सूची तैयार की। इसके बाद सफाई निरीक्षकों और सुपरवाइजरों की टीम ने घर-घर जाकर मौके का सत्यापन किया।
जांच में यह देखा गया कि संपत्ति सरकारी रिकॉर्ड में आवासीय दर्ज है या नहीं और वास्तव में वहां किस तरह की गतिविधि चल रही है।
नोटिस मिलने के बाद ये कागजात रखना होगा तैयार
जिन लोगों को नगर निगम का नोटिस मिला है, उन्हें सुनवाई के दौरान अपनी संपत्ति से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
इनमें मुख्य रूप से—
जमीन या मकान के मालिकाना हक का दस्तावेज
स्वीकृत भवन का नक्शा
ऑक्यूपेंसी/अधिभोग प्रमाण पत्र
व्यावसायिक गतिविधि से संबंधित एनओसी
गैर-आवासीय उपयोग को लेकर वैध अनुमति
अपनी आपत्ति या सफाई से संबंधित लिखित प्रमाण
शामिल हैं।
तय तारीख पर नहीं पहुंचे तो हो सकती है कार्रवाई
नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने के बाद तय तारीख पर सुनवाई में उपस्थित होना जरूरी है। यदि संबंधित व्यक्ति सुनवाई में नहीं पहुंचता या आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं करता है, तो निगम उपलब्ध सर्वे रिपोर्ट के आधार पर एकतरफा कार्रवाई कर सकता है।
ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार सीलिंग और जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है।
19 अगस्त से पटना में शुरू होगा बड़ा अभियान
आवासीय मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर नगर निगम की यह कार्रवाई अब राजधानी में बड़ा मुद्दा बन गई है। खास बात यह है कि कार्रवाई की जद में खुद मेयर सीता साहू का नाम आने से मामला और चर्चा में है।
अब सभी की नजर 19 अगस्त से शुरू होने वाली सुनवाई पर है। सुनवाई में मकान मालिकों के दस्तावेज और जवाब देखने के बाद नगर निगम तय करेगा कि किन संपत्तियों को राहत मिलेगी और किनके खिलाफ आगे कार्रवाई की जाएगी।
हिन्दुस्तानी मीडिया की नजर इस पूरे मामले पर बनी रहेगी। पटना से जुड़ी हर बड़ी और महत्वपूर्ण खबर के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
