साफ-सफाई पर जताई कड़ी नाराजगी, अनुपस्थि डॉक्टरों और जीएनएम से मांगा स्पष्टीकरण
बायोमेट्रिक अटेंडेंस और CCTV अनिवार्य, एक महीने में “फुल फ्लेज्ड” ट्रामा सेंटर बनाने का निर्देश
मधुबनी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित ट्रामा सेंटर की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने बुधवार देर शाम औचक निरीक्षण कर अस्पताल की व्यवस्थाओं की हकीकत देखी। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई से लेकर चिकित्सकीय व्यवस्था तक कई गंभीर खामियां सामने आने पर डीएम ने गहरी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ट्रामा सेंटर परिसर, वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी कक्ष, चिकित्सकीय उपकरण, मानव संसाधन और आधारभूत सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण यह ट्रामा सेंटर सड़क दुर्घटनाओं और आपातकालीन हालात में लोगों की जिंदगी बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गंदगी देख भड़के डीएम
ट्रामा सेंटर में साफ-सफाई की खराब स्थिति देखकर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि अस्पताल परिसर में नियमित मॉनिटरिंग के साथ गुणवत्तापूर्ण सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
15 दिन में अधूरे कार्य पूरे करने का निर्देश
डीएम आनंद शर्मा ने ट्रामा सेंटर की आधारभूत संरचनाओं को जल्द दुरुस्त करने का निर्देश देते हुए कहा कि जिला स्तर पर लंबित सभी कार्यों को 15 दिनों के भीतर पूरा किया जाए। वहीं राज्य स्तर पर लंबित योजनाओं को संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर एक महीने के अंदर पूर्ण कराने को कहा गया।
कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मिले अनुपस्थित
निरीक्षण के दौरान कई चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से गायब मिले। इस पर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए अनुपस्थित चिकित्सकों डॉ. कृष्ण कांत करुणाकर, डॉ. मधुसूदन कुमार, डॉ. मो. सादिक और डॉ. हिमांशु शेखर समेत दो जीएनएम से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। साथ ही ट्रामा सेंटर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से भी जवाब-तलब करने को कहा गया।
बायोमेट्रिक अटेंडेंस और CCTV होगा अनिवार्य
डीएम ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इसी को देखते हुए उन्होंने ट्रामा सेंटर में तत्काल बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया। साथ ही पूरे परिसर में CCTV कैमरे लगाने को कहा, ताकि कर्मियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की निगरानी हो सके।
“सिर्फ नाम का नहीं, पूरी क्षमता से चले ट्रामा सेंटर”
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि वर्तमान में ट्रामा सेंटर में सात चिकित्सक पदस्थापित हैं, इसलिए यहां की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावी तरीके से संचालित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रामा सेंटर को केवल नाम मात्र का केंद्र बनाकर नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे पूरी क्षमता और संसाधनों के साथ “फुल फ्लेज्ड” रूप से संचालित किया जाएगा।
डीएम आनंद शर्मा ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अगले एक महीने के भीतर ट्रामा सेंटर की सभी व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त कर आम लोगों के लिए पूर्ण रूप से कार्यशील बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा और सुधार नहीं होने पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
