पटना:जेडीयू नेता और ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के राष्ट्रीय अध्यक्ष नजरे आलम ने बिहार शिक्षा विभाग द्वारा जारी वर्ष 2026 के अवकाश कैलेंडर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार की मंशा किसी भी प्रकार के भेदभाव की नहीं है, लेकिन हालिया बदलावों के कारण मुस्लिम शिक्षकों को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ईद-उल-फितर और बकरीद जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों पर केवल एक-एक दिन की छुट्टी निर्धारित की गई है, जबकि पहले इन अवसरों पर अधिक दिनों की छुट्टियां दी जाती थीं। इसके अलावा, अलग-अलग स्कूलों के लिए अलग अवकाश व्यवस्था से भ्रम और असमानता की स्थिति पैदा हो रही है।
नजरे आलम ने कहा कि जब शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी के.के. पाठक के पास थी, उसी दौरान अवकाश प्रणाली में ऐसे बदलाव किए गए, जिनके कारण आज शिक्षकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे को आसानी से ठीक कर सकती है और पुराने सिस्टम को बहाल कर समाधान निकाल सकती है
उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं को सामने लाने की एक कोशिश है। खासकर वे शिक्षक जो दूरदराज के जिलों या अन्य स्थानों पर कार्यरत हैं, उनके लिए एक ही दिन में घर जाकर ईद मनाना और वापस ड्यूटी पर लौटना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
नजरे आलम ने राज्य सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे को तुरंत गंभीरता से ले और छुट्टियों में आवश्यक सुधार करे, ताकि शिक्षकों को सुविधा मिल सके और मुस्लिम समुदाय के बीच पैदा हो रही गलतफहमियों को भी दूर किया जा सके।
