Saturday, February 21, 2026
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मधुबनी में बिहार का पहला शिल्पग्राम शुरू केंद्र-राज्य सहयोग से हुआ उद्घाटन, देश का अनोखा पर्यटन स्थल बनेगा जितवारपुर

मधुबनी, बिहार: 21 फरवरी 2026 को जिले के प्रसिद्ध गांव जितवारपुर में बिहार का पहला शिल्पग्राम यानी क्राफ्ट टूरिज्म विलेज (Craft Tourism Village) विधिवत शुरू कर दिया गया। इस विशेष कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने किया। कार्यक्रम में स्थानीय सांसद, विधायक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।�

क्या है शिल्पग्राम/क्राफ्ट विलेज?
जितवारपुर, जो अपनी मधुबनी पेंटिंग की शैली और पारंपरिक मिथिला कला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, अब एक क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य है –
स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देना
कलाकारों और शिल्पकारों को नई बाज़ार संभावनाएँ देना
पर्यटन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना
युवा शिल्पकारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना

यह परियोजना भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय (Union Ministry of Textiles) व बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से साकार की गई है। इसमें बुनियादी सुविधाएँ, प्रदर्शनी स्थल और पर्यटन-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होंगे।�
कार्यक्रम में कौन-कौन रहे मौजूद?
उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग —
अरुण शंकर प्रसाद, कला एवं संस्कृति मंत्री, बिहार
अंजनी कुमार सिंह, महानिदेशक, बिहार संग्रहालय
सांसद अशोक कुमार यादव
विधायक मो. आसिफ अहमद
स्थानीय प्रशासन और कला विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
विविध पद्मश्री सम्मानित कलाकार

क्यों है यह शिल्पग्राम खास?
यह शिल्पग्राम इसलिए अनोखा माना जा रहा है क्योंकि –
यह मधुबनी कला और मिथिला संस्कृति को पर्यटन-योग्य रूप देता है
गांव पहले से ही प्रसिद्ध कलाकारों और पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं की पैदाईश स्थल रहा है
आने वाले पर्यटक अब सीधे कलाकारों से जुड़ सकेंगे, उनकी कला सीखेंगे और ख़रीद भी सकेंगेl
जितवारपुर में जन्म लेने वाली प्रसिद्ध बौआ देवी जैसी कलाकार को भी देश में पद्मश्री पुरस्कार मिल चुका है, जो इस इलाके की कला की महानता को दर्शाता है।�

इससे क्या लाभ होगा?
स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को बेहतर कमाई का अवसर मिलेगा
✔ पर्यटन के ज़रिए क्षेत्र में आर्थिक विकास होगा
✔ युवाओं को गाँव में ही काम और रोजगार मिलेगा
✔ मधुबनी की पारंपरिक कलाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी

सारांश: जितवारपुर आज सिर्फ एक ग्रामीण गांव नहीं रहा; अब यह बिहार का पहला शिल्पग्राम/क्राफ्ट विलेज है, जो अपनी कला, संस्कृति और लोगों की मेहनत को दुनिया के सामने ले जाएगा। इससे मधुबनी की कला को नई ऊँचाइयाँ मिलेंगी और देश-विदेश के कलाकार तथा पर्यटक इस गाँव की तहज़ीब को करीब से जान सकेंगे।�

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