मधुबनी (18 फरवरी 2026):
बिहार के मधुबनी जिले के प्रसिद्ध जितवारपुर गांव को अब एक क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से चल रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 21 फरवरी 2026 को इसका कार्यारम्भ समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें नयी दिशा में पर्यटन और कला को बढ़ावा देने की घोषणा होगी। �
यह परियोजना बिहार संग्रहालय की स्वीकृति मिलने के बाद अधिकृत रूप से शुरू की जा रही है। कार्यालयियों का कहना है कि इससे केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ही लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय हस्तशिल्प और मिथिला कला को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में भी मदद मिलेगी। �
क्राफ्ट विलेज का उद्देश्य
जितवारपुर क्राफ्ट टूरिज्म विलेज परियोजना का लक्ष्य है:
स्थानीय कला एवं संस्कृति को संरक्षित करना
ग्रामीण कलाकारों और कारीगरों को नई रोजगार अवसर प्रदान करना
मधुबनी की समृद्ध कला परंपरा को पर्यटन के साथ जोड़ना
हस्तशिल्प वस्तुओं की ब्रांडिंग और विपणन (मार्केटिंग) को सुदृढ़ करना �
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना हाथ से बने उत्पादों, पारंपरिक तकनीकों और मिथिला शिल्प को वैश्विक बाजार से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम और समारोह की रूपरेखा
21 फरवरी को आयोजित होने वाले समारोह में:
परियोजना के अधिकारी एवं सरकारी प्रतिनिधि शामिल होंगे
संस्कृति से जुड़े कलाकारों व शिल्पकारों को सम्मानित किया जाएगा
स्थानीय कला, संगीत और नृत्य के कार्यक्रम होंगे
परियोजना से जुड़े संभावित निवेशकों और पर्यटन विशेषज्ञों की बैठक भी आयोजित होगी
सरकार का मानना है कि यह पहल ग्रामीण पर्यटन को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी और मधुबनी को “क्राफ्ट टूरिज्म हब” के रूप में स्थापित करेगी। �
क्यों खास है जितवारपुर?
जितवारपुर बिहार का एक ऐसा गांव है जहाँ मिथिला पेंटिंग, काष्ठकला, कारीगरी और पारंपरिक शिल्प दशकों से घर-घर में विकसित होता रहा है। इस क्षेत्र की कला की पहचान अब तक सीमित थी, लेकिन क्राफ्ट टूरिज्म विलेज बनने के बाद यह कला देश-विदेश के पर्यटकों और कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है। �
सरकार ने यह भी कहा है कि जल्द ही यहाँ हस्तशिल्प प्रशिक्षण केंद्र, कला प्रदर्शनी केंद्र और होटल तथा होम-स्टे सुविधाएँ भी विकसित की जाएँगी, जिससे यहाँ का पर्यटन रूप और भी मजबूत होगा।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी गति
विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना से:
✔️ स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ेगी
✔️ युवा शिल्पकारों को रोजगार मिलेगा
✔️ पर्यटन के कारण आसपास के गाँवों में भी विकास आएगा
✔️ मधुबनी का समग्र आर्थिक परिदृश्य सकारात्मक रूप से प्रभावित होगा �
निष्कर्ष:
जितवारपुर क्राफ्ट टूरिज्म विलेज की शुरुआत न सिर्फ एक पर्यटन परियोजना है, बल्कि यह मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। स्थानीय समुदाय, कलाकार, कारीगर और सरकार मिलकर इसे एक सफल मॉडल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और 21 फरवरी का समारोह इसी दिशा में पहला बड़ा कदम साबित होगा। �
