मधुबनी | 9 फरवरी 2026
फ़ाइलेरिया रोग के उन्मूलन के उद्देश्य से मधुबनी जिले में 10 फरवरी 2026 से सामूहिक दवा सेवन (एम.डी.ए.) कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को मॉडल अस्पताल, मधुबनी में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मीडिया सहयोगियों के लिए एक संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि “फ़ाइलेरिया मुक्त मधुबनी बनाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी पात्र लाभार्थी फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन अवश्य करें।”
उन्होंने बताया कि अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए 11 फरवरी को मेगा एम.डी.ए. कैंप का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बूथ लगाकर स्वास्थ्यकर्मी समुदाय के लक्षित लाभार्थियों को अपने सामने दवा सेवन कराएंगे। इसके अलावा, अगले 14 दिनों तक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर छूटे हुए लाभार्थियों को दवा खिलाएंगे।
दवाएं पूरी तरह सुरक्षित : डी.एस. सिंह
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डी.एस. सिंह ने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। रक्तचाप, शुगर, अर्थराइटिस या अन्य सामान्य बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं अवश्य लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दवा सेवन के बाद यदि किसी को मितली या हल्का चक्कर महसूस होता है, तो यह शुभ संकेत है, जिसका अर्थ है कि शरीर में मौजूद फाइलेरिया परजीवी दवा के प्रभाव से नष्ट हो रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक प्रखंड में रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात रहेगी।
1,35,848 लाभार्थियों को दवा सेवन का लक्ष्य
एसीएमओ डॉ. एस.एन. झा ने जानकारी दी कि जिले के शहरी क्षेत्र के वार्ड 1 से 45 तक कुल जनसंख्या 1,59,822 के विरुद्ध 1,35,848 पात्र लाभार्थियों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डी.ई.सी. एवं अल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक दी जाएगी।
इसके लिए जिले में 72 बूथ, 45 टीमें, 9 सुपरवाइजर और 90 दवा सेवन दल गठित किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवाओं का वितरण नहीं किया जाएगा, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा अपने सामने दवा खिलाई जाएगी। दवा खाली पेट नहीं लेनी है। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी।
फ़ाइलेरिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या
सी.डी.ओ. डॉ. जी.एम. ठाकुर ने कहा कि फाइलेरिया (हाथीपांव रोग) एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह दुनिया में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है।
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति लगातार 5 वर्षों तक फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करता है, तो जीवनभर इस रोग से सुरक्षित रह सकता है।
मीडिया से सहयोग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने मीडिया सहयोगियों से अपील की कि वे अपने समाचार पत्रों और चैनलों के माध्यम से आम जनता तक यह संदेश पहुँचाएं कि सभी पात्र लाभार्थी स्वास्थ्यकर्मियों के सामने ही दवा सेवन सुनिश्चित करें और इस जनहित कार्यक्रम में पूरा सहयोग दें।
कार्यक्रम में उपस्थित
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार, डीपीआरओ परिमल कुमार, एसीएमओ डॉ. एस.एन. झा, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डी.एस. सिंह, सीडीओ डॉ. जी.एम. ठाकुर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज मिश्रा, पिरामल से धीरज सिंह, कुश कुमार, भीबीड डिंपू कुमार, अमर कुमार, सीफार के डिविजनल कोऑर्डिनेटर अमन कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
