दरभंगा जिले की वर्षों से बंद पड़ी ऐतिहासिक रैयाम चीनी मिल के पुनर्जीवन को लेकर एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है। प्रशासनिक स्तर पर हुई अहम बैठक और एक नए आदेश के बाद यह संकेत मिले हैं कि अब यह औद्योगिक इकाई फिर से चालू होने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो दरभंगा में एक बार फिर “चीनी वाली मिठास” लौट सकती है।
डीएम की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
जानकारी के अनुसार, दरभंगा के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में रैयाम चीनी मिल के पुनर्स्थापन को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में मिल की मौजूदा स्थिति, भूमि, मशीनरी और कानूनी पहलुओं पर चर्चा की गई। संबंधित विभागों को आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों के लिए बड़ी राहत
रैयाम चीनी मिल के बंद होने से सबसे अधिक नुकसान गन्ना किसानों को उठाना पड़ा था। मिल चालू होने के बाद—
किसानों को गन्ने का स्थानीय बाजार मिलेगा
गन्ने की खेती फिर से लाभकारी बन सकेगीl
बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी
इससे जिले में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
चीनी मिल के पुनर्जीवित होने से—
सैकड़ों स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार
ट्रांसपोर्ट, खेती और छोटे व्यवसायों में अप्रत्यक्ष रोजगार
पलायन पर ब्रेक लगने की संभावना
खासतौर पर ग्रामीण युवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
औद्योगिक पहचान की वापसी
रैयाम चीनी मिल कभी दरभंगा की औद्योगिक पहचान हुआ करती थी। इसके चालू होने से—
जिले की औद्योगिक छवि मजबूत होगी
अन्य बंद पड़ी इकाइयों के लिए भी रास्ता खुलेगा
निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा
इतिहास भी रहा है गौरवशाली
बताया जाता है कि रैयाम चीनी मिल की स्थापना 1914 के आसपास हुई थी और कई दशकों तक यह मिल दरभंगा और आसपास के इलाकों की जीवनरेखा बनी रही। लंबे समय से बंद रहने के कारण यह सिर्फ इमारत बनकर रह गई थी, लेकिन अब इसके फिर से जीवित होने की संभावना ने लोगों में उत्साह भर दिया है।
अब सबकी नजर अगले आदेश पर
फिलहाल सबकी नजर सरकार और प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी है। यदि प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो जल्द ही रैयाम चीनी मिल की चिमनियों से धुआं उठता दिख सकता है।
दरभंगा को एक बार फिर मिल सकता है औद्योगिक स्वाद — “चीनी वाली मिठास”।
