Friday, February 6, 2026
No menu items!
Homeकिसानमधुबनी में नीलगाय–बंदरों से फसल बर्बादी का मुद्दा विधानसभा में गूंजा, सरकार...

मधुबनी में नीलगाय–बंदरों से फसल बर्बादी का मुद्दा विधानसभा में गूंजा, सरकार ने कि स्थिति स्पष्ट

 

मधुबनी के विधायक श्री माधव आनंद ने 24 जनवरी 2026 को बिहार विधानसभा में तारांकित प्रश्न के माध्यम से जिले के किसानों की गंभीर समस्या को मजबूती से उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या यह सही है कि मधुबनी जिला अंतर्गत मंडल एवं पंडौल प्रखंड के बैलाही पंचायत सहित कई गांवों में नीलगाय (घोड़परास) एवं बंदरों के उत्पात से हजारों एकड़ में लगी फसलें नष्ट हो रही हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि सरकार इस समस्या के समाधान के लिए कब तक ठोस कार्रवाई करेगी।

इस तारांकित प्रश्न का उत्तर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने 2 फरवरी 2026 को विधानसभा में दिया। मंत्री ने अपने जवाब में आंशिक रूप से समस्या को स्वीकार किया।

डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि वन्य प्राणी संरक्षण (संशोधित) अधिनियम, 2022 के तहत बंदर को अनुसूची से हटा दिया गया है, जिसके कारण बंदर अब वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत संरक्षित नहीं हैं। इस वजह से बंदरों से संबंधित मामलों में पर्यावरण विभाग, बिहार सरकार के स्तर से किसी प्रकार की सीधी कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पंडौल प्रखंड के बैलाही पंचायत सहित अन्य गांवों में नीलगाय द्वारा हजारों एकड़ में फसल बर्बादी की कोई आधिकारिक सूचना विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने बताया कि हाल के समय में 7 नीलगाय (घोड़परास) का नियमानुसार नियंत्रण किया गया है।

क्षतिपूर्ति और सहायता का प्रावधान

मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि पंचायत सीमा के भीतर गैर-वन क्षेत्रों में नीलगाय एवं जंगली सूअर द्वारा खेती एवं बागवानी की फसलों को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में सरकार द्वारा सहायता का प्रावधान किया गया है—

फसल नष्ट होने पर ₹50,000 प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता राशि भुगतान का प्रावधान है।

नीलगाय (घोड़परास) के मारे जाने की स्थिति में लाश उठाने वाले व्यक्ति को ₹750 की राशि दी जाती है।

मारे गए घोड़परास को जमीन में गाड़ने वाले व्यक्ति को ₹1,250 की सहायता राशि प्रदान की जाती है।

सरकार के अनुसार यह व्यवस्था किसानों को आंशिक राहत देने तथा मानव-वन्य जीव संघर्ष को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।

मधुबनी के विधायक श्री माधव आनंद द्वारा यह मुद्दा विधानसभा में उठाए जाने के बाद जिले के किसानों की समस्या एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अब किसानों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार जमीनी स्तर पर इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

अभी अभी

लोकप्रिय खबर