पूर्णिया से सांसद और छह बार लोकसभा तथा एक बार विधानसभा सदस्य रह चुके राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की देर रात गिरफ्तारी को लेकर बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है। इस कार्रवाई को लेकर पार्टी नेताओं और समर्थकों ने सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है।
इस संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए प्रकाश चंद्र झा — (पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, संसदीय बोर्ड के सदस्य एवं दरभंगा जिला प्रभारी) ने कहा कि जिस तरीके से सांसद पप्पू यादव को रात साढ़े दस बजे सिविल ड्रेस में गिरफ्तार किया गया, वह न केवल सवालों के घेरे में है बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी खिलाफ है।
प्रकाश चंद्र झा ने कहा कि गिरफ्तारी के समय
कोई वारंट नहीं दिखाया गया,
मामले में पप्पू यादव का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है,
और जिस केस का हवाला दिया जा रहा है, वह 30–35 साल पुराना बताया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि संसद सत्र समाप्त होने के बाद पप्पू यादव पटना लौटे थे और निर्धारित तारीख पर अदालत में उपस्थित होने की तैयारी में थे, इसके बावजूद एक दिन पहले ही रात में उन्हें हिरासत में लिया गया।
पार्टी नेताओं का कहना है कि हाल के दिनों में पप्पू यादव ने NEET छात्रा की संदिग्ध मौत और गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े गंभीर आरोपों को लेकर खुलकर आवाज़ उठाई थी। उन्होंने इस मामले में राजनीतिक रसूख वाले लोगों और नेताओं के बेटों की भूमिका की जांच की मांग की थी। आरोप लगाया जा रहा है कि इसी वजह से उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश की गई।
प्रकाश चंद्र झा ने कहा,
“लोकतंत्र में सच बोलने वालों को डराया नहीं जा सकता। सूरज को ढकने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन रोका नहीं जा सकता।”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एक मौजूदा सांसद को इस तरह रात में सिविल ड्रेस में गिरफ्तार करना क्या लोकतंत्र में उचित है। उनका कहना था कि इस तरह की कार्रवाई से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
इसके साथ ही यूजीसी से जुड़े हालिया कानून पर भी नाराज़गी जताई गई। नेताओं ने इसे एकतरफा और जनविरोधी कानून बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की।
फिलहाल, सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर बिहार से लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि जनता सब देख और समझ रही है, और अंततः सच सामने आएगा।
