नई दिल्ली। बजट पर चर्चा के दौरान सांसद Sanjay Yadav ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आर्थिक असमानता, बढ़ती महंगाई और गरीबों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में “सबका साथ, सबका विश्वास और सबका न्याय” की बात की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है।
संजय यादव ने एक मुख्यमंत्री के कथित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि गरीब रिक्शा चालक से पाँच रुपये मांगने पर चार रुपये देने और एक रुपया अपने पास रखने जैसी सोच नफरत और असंवेदनशीलता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह देश की एकता और आजादी के मूल्यों के खिलाफ है।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की आजादी में हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी समुदायों ने कुर्बानी दी है। उन्होंने शहीदों का हवाला देते हुए कहा कि देश का इतिहास गवाह है कि आजादी की लड़ाई सबने मिलकर लड़ी थी।
“20 लोग तय कर रहे अर्थव्यवस्था की दिशा”
संजय यादव ने आरोप लगाया कि आज देश की अर्थव्यवस्था कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में सिमटती जा रही है। उन्होंने कहा कि देश के 20 लोग पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं, जबकि करोड़ों लोग महंगाई और बेरोजगारी का बोझ उठा रहे हैं।
उन्होंने आर्थिक असमानता के आंकड़े रखते हुए कहा कि शीर्ष 10 प्रतिशत लोगों के पास राष्ट्रीय आय का लगभग 58 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि शीर्ष 1 प्रतिशत लोगों के पास देश की 40 प्रतिशत से अधिक संपत्ति केंद्रित है।
“चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था, लेकिन प्रति व्यक्ति आय कम”
सांसद ने कहा कि भारत का दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का दावा गर्व का विषय है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय मात्र लगभग 2.20 लाख रुपये होना चिंता का विषय है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि जापान और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों की आबादी कम होने के बावजूद उनकी प्रति व्यक्ति आय भारत से कई गुना अधिक है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में 81 करोड़ लोगों को पांच किलो मुफ्त अनाज देना पड़ रहा है, जो दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर आर्थिक हालात गंभीर हैं।
संजय यादव ने कहा कि यह समय सामूहिक चिंतन का है कि देश में इतनी आर्थिक असमानता क्यों बढ़ रही है और बजट में आम लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं दिखते।
उन्होंने अंत में कहा कि आर्थिक विकास का वास्तविक अर्थ तभी है जब उसका लाभ देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
