दरभंगा। बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को लेकर हो रही बयानबाजी पर जदयू नेता नजरे आलम ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव के दौरान हार-जीत होती रहती है। किसी एक चुनाव के नतीजे के आधार पर जदयू के वजूद या संजय कुमार झा की राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाना राजनीतिक अपरिपक्वता और ओछी मानसिकता का परिचायक है।
नजरे आलम ने कहा कि कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि संजय कुमार झा अपने ही मिथिला क्षेत्र में उम्मीदवारों को जीत क्यों नहीं दिला सके। उन्होंने कहा कि किसी एक चुनाव का परिणाम किसी अनुभवी नेता के पूरे राजनीतिक जीवन और संगठनात्मक योगदान का पैमाना नहीं हो सकता। चुनावी नतीजों की समीक्षा करना जरूरी है, लेकिन इसे व्यक्तिगत अपमान और राजनीतिक चरित्रहनन का माध्यम बनाना उचित नहीं है।
संजय कुमार झा का राजनीतिक कद बयानों से तय नहीं होता: नजरे आलम
नजरे आलम ने कहा कि संजय कुमार झा का राजनीतिक कद किसी के बयान से न बढ़ता है और न घटता है। उनके मुताबिक, जदयू ने संगठन को मजबूत करने और पार्टी को स्थापित करने की दिशा में लगातार काम किया है। उन्होंने पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू की 85 सीटों पर जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पार्टी के राजनीतिक आधार और संगठनात्मक क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि विधान परिषद चुनाव में कुछ सीटों पर हार के आधार पर पूरी पार्टी के भविष्य पर सवाल उठाना राजनीतिक समझ की कमी को दर्शाता है। किसी भी चुनाव के परिणाम को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखना चाहिए।
असहमति के नाम पर अपमानजनक बयानबाजी उचित नहीं
जदयू नेता ने कहा कि राजनीति में असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन असहमति के नाम पर किसी नेता के राजनीतिक कद को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करना सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग व्यक्तिगत टिप्पणियों के सहारे अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं।
नजरे आलम ने कहा कि जो लोग कभी जदयू से जुड़े रहे और जिन्हें पार्टी में सम्मान तथा राजनीतिक अवसर मिले, उन्हें भी राजनीतिक मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। उनके अनुसार, राजनीतिक पहचान और सम्मान केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि काम और जनता के बीच भूमिका से बनते हैं।
चुनावी नतीजों की समीक्षा करेगी जदयू
नजरे आलम ने स्पष्ट किया कि जदयू विधान परिषद चुनाव के नतीजों पर गंभीरता से विचार करेगी। पार्टी अपनी कमियों की समीक्षा करेगी और आने वाले समय में संगठन को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने कहा कि चुनावी परिणामों से सीखना हर राजनीतिक दल के लिए जरूरी है, लेकिन विरोधियों के दावों को ही अंतिम राजनीतिक सच्चाई नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि जदयू के वजूद और संजय कुमार झा के नेतृत्व पर सवाल उठाने वालों को समय जवाब देगा। राजनीति में किसी नेता की हैसियत उसके काम, संगठनात्मक क्षमता और जनता के बीच उसकी भूमिका से तय होती है।
नजरे आलम ने अंत में कहा कि जदयू न खत्म हुई है और न ही किसी की बयानबाजी से खत्म होने वाली है। पार्टी चुनावी नतीजों से सीख लेकर आगे बढ़ेगी और अपने संगठन को मजबूत करने के लिए काम करती रहेगी।
