पटना: बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। इंद्रपुरी बराज से सोन नदी में करीब 5.54 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद सोन नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। पटना जिले के मनेर में सोन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं पुनपुन नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। श्रीपालपुर में पुनपुन नदी खतरे के निशान से करीब 2 मीटर ऊपर बह रही है, जिसके कारण आसपास के निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा है।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई जगहों पर लोगों को जलजमाव और बाढ़ की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव की तैयारी की जा रही है।
इंद्रपुरी बराज से छोड़ा गया 5.54 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी
सोन नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह इंद्रपुरी बराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जाना है। बराज से करीब 5.54 लाख क्यूसेक से अधिक पानी सोन नदी में छोड़ा गया है। इसके बाद नदी के आसपास के इलाकों में जलस्तर बढ़ने लगा है।
मनेर में सोन नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। ऐसे में नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
श्रीपालपुर में पुनपुन नदी खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर
सोन के साथ-साथ पुनपुन नदी भी उफान पर है। श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 2 मीटर ऊपर पहुंच गया है।
नदी का पानी आसपास के घरों तक पहुंचने लगा है। जलस्तर में और वृद्धि होने पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और बाढ़ के पानी से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
बाढ़ प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करने का निर्देश
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
इस सूची के आधार पर बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से:
मकान को हुआ नुकसान
फसल की क्षति
पशुओं को हुआ नुकसान
पशुओं के बाड़े या शेड की क्षति
बाढ़ में घर पूरी तरह बहने या ध्वस्त होने की स्थिति
आपदा में मृत्यु या अंग क्षति
जैसे मामलों का आकलन किया जाएगा।
सरकारी प्रावधानों के तहत सत्यापन और नुकसान के आकलन के बाद पात्र प्रभावित परिवारों को राहत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
मकान टूटने पर कितनी मिलेगी सरकारी सहायता?
बाढ़ के कारण मकान को हुए नुकसान के आधार पर अलग-अलग राहत राशि निर्धारित है। उपलब्ध प्रावधान के अनुसार सहायता इस प्रकार है:
नुकसान राहत राशि
पक्का मकान पूरी तरह ध्वस्त ₹1.20 लाख
आंशिक रूप से पक्का मकान क्षतिग्रस्त ₹6,500
आंशिक रूप से कच्चा मकान क्षतिग्रस्त ₹4,000
झोपड़ी पूरी तरह नष्ट ₹8,000
पशुओं का बाड़ा/शेड नष्ट ₹3,000
ध्यान रहे कि राहत राशि संबंधित सरकारी नियमों और प्रशासन द्वारा किए गए आधिकारिक नुकसान के आकलन के आधार पर दी जाएगी।
फसल बर्बाद हुई तो भी मिलेगी राहत
बाढ़ का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ता है। खेतों में पानी भरने से खड़ी फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को भी राहत देने का प्रावधान है।
सामान्य स्थिति में फसल नुकसान के लिए प्रति परिवार ₹7,000 राहत अनुदान का प्रावधान बताया गया है।
हालांकि पानी कम होने के बाद कृषि विभाग की ओर से फसल और पेड़-पौधों को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग फसलों के लिए निर्धारित सरकारी दर के आधार पर नुकसान का आकलन और भुगतान किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में खेतों में खड़ी फसल, बागवानी और पेड़-पौधों को हुए नुकसान को भी देखा जा सकता है।
बाढ़ में मौत होने पर आश्रितों को ₹4 लाख
बाढ़ या किसी अन्य आपदा में व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में उसके आश्रितों को ₹4 लाख की राहत राशि दिए जाने का प्रावधान है।
इसके अलावा बाढ़ के दौरान घायल होने या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में भी अलग-अलग श्रेणी के अनुसार सहायता का प्रावधान है।
अस्पताल में भर्ती होने पर सहायता
एक सप्ताह या उससे अधिक अस्पताल में भर्ती: ₹16,000
एक सप्ताह से कम अस्पताल में भर्ती: ₹5,400
अंग क्षति/अपंगता पर सहायता
40 प्रतिशत अपंगता/अंग क्षति: ₹74,000
60 प्रतिशत अपंगता: ₹2.50 लाख
इन मामलों में भी पात्रता और भुगतान संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों तथा मेडिकल/प्रशासनिक सत्यापन के आधार पर होगा।
घर बहने पर कपड़े और बर्तन के लिए भी सहायता
बाढ़ में जिन परिवारों का घर पूरी तरह बह जाता है या गंभीर रूप से प्रभावित होता है, उनके सामने रहने के साथ-साथ रोजमर्रा के जरूरी सामान की भी समस्या खड़ी हो जाती है।
ऐसी स्थिति में कपड़े, बर्तन और अन्य जरूरी सामान के लिए भी सहायता का प्रावधान है।
कपड़ों के लिए: ₹2,500
बर्तन के लिए: ₹2,500
अन्य जरूरी सामान के लिए: ₹2,000
इस सहायता का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल आवश्यक घरेलू सामान उपलब्ध कराने में मदद करना है।
निचले इलाकों में रहने वाले लोग रहें सावधान
सोन और पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी के आसपास तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे बाढ़ के पानी में अनावश्यक रूप से न जाएं। बच्चों को नदी, नहर और तेज बहाव वाले पानी से दूर रखें। यदि प्रशासन की ओर से सुरक्षित स्थान या राहत शिविर में जाने का निर्देश दिया जाता है तो उसका पालन करें।
बाढ़ की स्थिति में बिजली के खंभों, टूटे तारों और जलमग्न सड़कों से भी दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
प्रशासन की राहत और बचाव पर नजर
बिहार में लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी के साथ-साथ प्रभावित परिवारों की पहचान और नुकसान के आकलन पर भी जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ से प्रभावित लोगों को समय पर राहत उपलब्ध कराई जाए और जिन परिवारों को मकान, फसल या पशुओं के नुकसान का सामना करना पड़ा है, उन्हें सरकारी प्रावधान के अनुसार सहायता मिल सके।
फिलहाल सोन और पुनपुन नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
