मधुबनी। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 23/24 में मोमिन टोला, मदरसा चौक से तिलक चौक स्थित जिला केंद्रीय पुस्तकालय तक सार्वजनिक सड़क की जमीन खेसरा संख्या 84 पर कथित अतिक्रमण का मामला अब एक बार फिर सुर्खियों में है। पटना हाईकोर्ट के 14 अगस्त 2026 के आदेश के बाद आरटीआई एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता वीरेन्द्र कुमार निधि ने 20 अगस्त को नगर आयुक्त, मधुबनी के समक्ष समुचित अभ्यावेदन दाखिल किया है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले में पहले CWJC No. 14350/2025 के तहत 1 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने आवेदक को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष जाने का निर्देश दिया था। इसके बाद आवेदक ने Civil Review No. 300/2025 दाखिल करते हुए कहा कि जमीन नगर निगम क्षेत्र में है और अतिक्रमण हटाने का अधिकार बिहार नगरपालिका अधिनियम की संशोधित धारा 435 के तहत नगर आयुक्त को है।
14 अगस्त 2026 को Acting Chief Justice सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने आदेश में संशोधन करते हुए नगर आयुक्त के समक्ष अभ्यावेदन देने और लागू कानून के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
हालांकि, कोर्ट ने अतिक्रमण के मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। अंतिम निर्णय सक्षम नगर प्राधिकारी को कानून के अनुसार लेना है।
19 अतिक्रमणकारियों को पहले ही जारी हो चुके हैं नोटिस!
अभ्यावेदन में कहा गया है कि नगर निगम की ओर से खेसरा संख्या 84 की अमीन से मापी कराई गई थी। आवेदक के अनुसार, मापी में 19 व्यक्तियों द्वारा अतिक्रमण पाए जाने के बाद 2 सितंबर 2025 को संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे।आवेदक का कहना है कि नोटिस के बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अब हाईकोर्ट के नए आदेश के बाद नगर आयुक्त के स्तर से कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
आठ सप्ताह में अतिक्रमण हटाने की मांग
अभ्यावेदन में अमीन मापी रिपोर्ट, नक्शा, पूर्व में जारी नोटिस और सुनवाई के आधार पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लेकर स्थायी-अस्थायी अतिक्रमण हटाने तथा नियमानुसार देय अर्थदंड की वसूली की मांग की गई है।
अभ्यावेदन के साथ हाईकोर्ट के आदेश, नगर विकास विभाग का संबंधित पत्र और कथित अतिक्रमित सड़क की तस्वीरें भी संलग्न की गई हैं। इसकी प्रतिलिपि मधुबनी के जिलाधिकारी को भी दी गई है।
अब बड़ा सवाल यही है—हाईकोर्ट के आदेश के बाद खेसरा 84 से कथित अतिक्रमण हटाने को लेकर नगर निगम कब और क्या कार्रवाई करता है?
