Wednesday, August 12, 2026
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मंडल कारा में बंद विचाराधीन कैदी की मौत से मचा हड़कंप, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप; FSL टीम ने जुटाए साक्ष्य

 
मधुबनी। मंडल कारा रामपट्टी में बंद एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद जिले में सनसनी फैल गई। घटना के बाद जेल प्रशासन से लेकर पुलिस महकमे तक हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान अरेर थाना क्षेत्र के ब्रह्मोत्रा गांव निवासी रौशन यादव (पिता- रामदयाल यादव) के रूप में हुई है।

कैदी की मौत की सूचना मिलते ही प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी। मौत की वजह को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए FSL की टीम मंडल कारा के घटनास्थल के साथ सदर अस्पताल पहुंची और आवश्यक साक्ष्य जुटाए।

दो दिन पहले भाई से मिलने पहुंची थी बहन, फिर रात में मिली मौत की खबर
मृतक की बहन ने बताया कि वह शनिवार को अपने भाई रौशन यादव से मिलने मंडल कारा रामपट्टी गई थीं। उनके मुताबिक, उस समय रौशन बिल्कुल स्वस्थ दिखाई दे रहा था। लेकिन सोमवार की रात अचानक जेल से फोन आया और भाई की मौत की सूचना दी गई। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया और परिजन आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंचे।

परिजनों का बड़ा आरोप- शरीर पर चोट और गले पर निशान
सदर अस्पताल पहुंचे मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक की बहन का दावा है कि रौशन के शरीर पर चोट के निशान और गले पर रस्सी जैसे निशान दिखाई दे रहे थे।
परिजनों ने मामले को संदिग्ध बताते हुए जेल में बंद कैदियों और जेल कर्मियों पर हत्या का आरोप लगाया है। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौत की वास्तविक वजह जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

करीब दो महीने से जेल में बंद था रौशन
जानकारी के अनुसार, रौशन यादव को करीब दो महीने पहले रहिका थाना पुलिस ने आर्म्स एक्ट के एक मामले में गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि वह अपने परिवार के साथ रहिका थाना क्षेत्र के बलाट गांव स्थित ननिहाल में रहता था।

मजिस्ट्रेट की निगरानी में हुआ पोस्टमार्टम
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की निगरानी के लिए वरीय उपसमाहर्ता बिरजू दास को मजिस्ट्रेट नियुक्त किया।
उनकी निगरानी में मेडिकल टीम ने शव का पोस्टमार्टम किया। मेडिकल टीम में डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. विकास कुमार और डॉ. अभिषेक कुमार झा शामिल रहे।
प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम और FSL रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

जेल अधीक्षक ने बयान देने से किया इनकार
घटना के बाद सदर अस्पताल में बड़ी संख्या में मृतक के परिजन और अन्य लोग पहुंच गए। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए नगर थाना की पुलिस भी अस्पताल परिसर में तैनात रही।
वहीं, जेल अधीक्षक ओम प्रकाश शांति भूषण ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से उन्हें इस मामले में बयान देने से मना किया गया है।अब इस पूरे मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और FSL जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि रौशन यादव की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था।

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