मधुबनी। जिला अधिवक्ता संघ, मधुबनी के एक सदस्य अधिवक्ता के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेंद्र कुमार निधि ने 10 अगस्त 2026 को जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष/महासचिव को आवेदन सौंपा है। 
आवेदन में अधिवक्ता लालू प्रधान पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने दुर्भावना से प्रेरित होकर निजी लाभ और कथित नाजायज उगाही के उद्देश्य से परिवादी को संज्ञान में दिए बगैर एक मामले को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। आवेदक ने इसे अधिवक्ता अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए पेशेवर कदाचार (Professional Misconduct) का मामला बताया है।
आवेदन के मुताबिक, मामला सीओ आरओ केस संख्या 06/2026 से जुड़ा है। आवेदक का आरोप है कि इस मामले में उनके और उनके परिवार से जुड़े लोगों को विवाद में घसीटने के साथ उनके इंजीनियर पुत्र अभिषेक कुमार निधि, जो करीब 10 वर्षों से नोएडा में रह रहे हैं, का नाम भी पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में दर्ज कराया गया। वीरेंद्र कुमार निधि ने आवेदन में कहा है कि बाद में मामले के परिवादी की ओर से 10 जुलाई 2026 को न्यायालय में आवेदन देकर परिवाद वापस लेने की मांग की गई। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि परिवादी ने न्यायालय के समक्ष अधिवक्ता द्वारा निजी कारण से नाम दर्ज कराने की बात कही थी।
इसी आधार पर आवेदक ने जिला अधिवक्ता संघ से पूरे मामले की जांच कर अधिवक्ता लालू प्रधान के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा उनकी अधिवक्ता के रूप में अनुमति रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
⚠️ जरूरी बात
यह खबर आवेदन में लगाए गए आरोपों और दावों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस दस्तावेज से नहीं होती और संबंधित अधिवक्ता का पक्ष इस आवेदन में उपलब्ध नहीं है।
