पटना: बिहार बंद के दौरान राजधानी पटना में हुई हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में गिरफ्तार जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजप्रताप यादव को मंगलवार को बेउर केंद्रीय कारा से रिहा कर दिया गया। करीब चार दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद सरकार के निर्णय के अनुसार उन्हें जेल से रिहा किया गया। रिहाई के बाद जेल परिसर के बाहर बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। फूल-मालाओं से स्वागत किया गया और समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया।
बिहार बंद के दौरान हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि बिहार बंद के दौरान राजधानी पटना समेत कई जिलों में प्रदर्शन, सड़क जाम, आगजनी और हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। इसी दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों के साथ तेजप्रताप यादव को भी हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया।
पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने, भीड़ को उग्र बनाने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने जैसी घटनाओं में उनकी भूमिका की जांच की जा रही थी। इस मामले में विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
सरकार ने लिया बड़ा फैसला
छात्र आंदोलन और बिहार बंद के बाद राज्य सरकार ने पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की। इसके बाद सरकार ने घोषणा की कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसी फैसले के तहत तेजप्रताप यादव सहित अन्य गिरफ्तार लोगों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ।
सरकार के इस फैसले के बाद जेल प्रशासन को आवश्यक निर्देश प्राप्त हुए, जिसके बाद मंगलवार को सभी औपचारिकताएं पूरी कर तेजप्रताप यादव को बेउर जेल से रिहा कर दिया गया।
जेल से बाहर आते ही समर्थकों का उमड़ा हुजूम
बेउर जेल से बाहर निकलते ही तेजप्रताप यादव का समर्थकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सुबह से ही जेल के बाहर मौजूद थे। जैसे ही वह बाहर आए, समर्थकों ने फूल-मालाएं पहनाईं, नारे लगाए और मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया। कुछ समर्थक ढोल-नगाड़ों के साथ भी पहुंचे थे।
तेजप्रताप यादव ने क्या कहा?
जेल से बाहर आने के बाद तेजप्रताप यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि वह जनता के मुद्दों को पहले भी उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि संघर्ष जारी रहेगा और जनता के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई नहीं रुकेगी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद से ही बिहार की राजनीति गरमा गई थी। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए सरकार की आलोचना की थी, जबकि सरकार का कहना था कि कानून अपने अनुसार काम कर रहा है और हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
अब उनकी रिहाई के बाद एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बना रह सकता है।
आगे क्या?
हालांकि रिहाई के बावजूद मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हुई है या नहीं, इस पर अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। यदि सरकार द्वारा दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी होती है, तो इससे बिहार बंद के दौरान गिरफ्तार अन्य लोगों को भी राहत मिल सकती है।
फिलहाल तेजप्रताप यादव की रिहाई के बाद उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल है, वहीं विपक्ष इसे अपनी नैतिक जीत के रूप में पेश कर रहा है। आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम पर बिहार की राजनीति की नजर बनी रहेगी।
