दरभंगा: उत्तराखण्ड सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के निर्णय को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। इसी कड़ी में दरभंगा में ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां की ओर से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जदयू नेता नजरे आलम ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया। उन्होंने सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नजरे आलम ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और अपने शैक्षणिक संस्थानों के संचालन का अधिकार प्रदान करता है। उनका कहना था कि मदरसे केवल धार्मिक शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे नैतिक मूल्यों, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है तो उसे समाप्त करने के बजाय आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहजीब, धार्मिक विविधता और सामाजिक सौहार्द से है। ऐसे में किसी भी समुदाय के शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े फैसले संविधान की भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होने चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार और उत्तराखण्ड सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने तथा सभी पक्षों से संवाद के बाद आगे की कार्रवाई करने की अपील की।
नजरे आलम ने कहा कि शिक्षा और सामाजिक सौहार्द से जुड़े विषयों पर राजनीतिक दृष्टिकोण के बजाय संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन उसे समाप्त करने जैसे कदम समाज में अनावश्यक विवाद पैदा कर सकते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना मेहदी रज़ा रौशनुल क़ादरी, अशरफ़ अहमद, मौलाना बशीरुल हुडा क़ादरी, मास्टर सादिक़ हुसैन सहित संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने उत्तराखण्ड सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और संविधान में निहित अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।
