Monday, June 22, 2026
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डॉ. महेंद्र नाथ झा की मैथिली पुस्तक ‘मंत्र’ का लोकार्पण

अजित आजाद बोले—नवोदित और युवा लेखक आगे आएं
मधुबनी। जिला मुख्यालय स्थित कुलशील में सोमवार को मैथिली साहिपुस्तक का लोकार्पण साहित्य अकादमी से सम्मानित साहित्यकार अजित आजाद, साहित्यकार लंबोदर झा, संपादक पारस कुमार सिंह झा, प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल, डॉ. इंद्रमोहन झा, डॉ. विनय विश्वबंधु, पत्रकार उदय कुमार झा और कमलेश झा ने संयुक्त रूप से किया।त्य के लिए एक यादगार कार्यक्रम आयोजित किया गया। दरभंगा जिले के उजान गांव निवासी डॉ. महेंद्र नाथ झा की लिखित मैथिली पुस्तक ‘मंत्र’ का भव्य लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में शहर के कई वरिष्ठ साहित्यकार, विद्वान, पत्रकार और साहित्यप्रेमी शामिल हुए।

पुस्तक का लोकार्पण साहित्य अकादमी से सम्मानित साहित्यकार अजित आजाद, साहित्यकार लंबोदर झा, संपादक पारस कुमार सिंह झा, प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल, डॉ. इंद्रमोहन झा, डॉ. विनय विश्वबंधु, पत्रकार उदय कुमार झा और कमलेश झा ने संयुक्त रूप से किया।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवती वंदना और दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद वक्ताओं ने पुस्तक ‘मंत्र’ की भाषा, कथानक और मैथिली साहित्य में इसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की।


नवारंभ प्रकाशन से प्रकाशित इस पुस्तक में मैथिली कथा सहित कई विधाओं की रचनाएं शामिल हैं। पुस्तक में सात अध्याय और तीन परिशिष्ट हैं। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. महेंद्र नाथ झा की लेखनी सरल, प्रभावशाली और पाठकों को अंत तक जोड़े रखने वाली है।

साहित्यकार अजित आजाद ने कहा कि मैथिली भाषा और साहित्य को आगे बढ़ाने के लिए नवोदित, युवा और अर्वाचीन लेखकों को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैथिली साहित्य के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं और ऐसे समय में ‘मंत्र’ जैसी पुस्तकें साहित्य जगत को नई दिशा देती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कथा-संग्रह पाठकों के बीच लोकप्रिय होगा।

पुष्पांजलि के संपादक पारस कुमार सिंह झा ने कहा कि वर्तमान समय में मैथिली कथा साहित्य लिखना चुनौतीपूर्ण कार्य है। डॉ. महेंद्र नाथ झा ने अपनी पुस्तक के माध्यम से कथा साहित्य को समृद्ध करने का सराहनीय प्रयास किया है।


डॉ. विनय विश्वबंधु ने कहा कि मैथिली कथा साहित्य लगातार आगे बढ़ रहा है और नई पुस्तकों के प्रकाशन से इसकी ताकत बढ़ रही है। डॉ. इंद्रमोहन झा ने नवारंभ प्रकाशन की सराहना करते हुए कहा कि कम समय में चार सौ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन कर संस्थान ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

लंबोदर झा ने कहा कि ‘मंत्र’ की कहानियों में पाठकों को अंत तक बांधे रखने की क्षमता है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण चिकित्सक के रूप में सेवा देते हुए भी डॉ. महेंद्र नाथ झा का साहित्य से गहरा जुड़ाव रहा है। उनके आलेख और कथाएं पहले ‘मिथिला मिहिर’ पत्रिका में भी प्रकाशित होती रही हैं।

कार्यक्रम को डॉ. शुभ कुमार वर्णवाल, कार्तिक कुमार और कुंजन कुमार पुट्टी सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन लंबोदर झा ने किया।

इस अवसर पर अस्मित अनंत, मृदुल श्री, मान्या श्री, बनारसी सहित कई साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. महेंद्र नाथ झा के पुत्र शंकर कुमार बबलू ने किया, जबकि आयोजन में कार्तिक कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

 

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