दरभंगा, 20 जून।
ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जनता दल (यूनाइटेड) के सदस्य नजरे आलम ने केवटी विधानसभा क्षेत्र के विधायक मुरारी मोहन द्वारा केवटी थाना परिसर में दिए गए धरने और कथित बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि एक जनप्रतिनिधि का दायित्व सभी वर्गों की समस्याओं और उनकी आवाज़ को उठाना होता है, न कि किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना।
नजरे आलम ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने और जनता के मुद्दों को उठाने का पूरा अधिकार है। हालांकि, यदि किसी धरने, सार्वजनिक मंच या बयान के माध्यम से किसी विशेष जाति या धर्म, खासकर मुस्लिम समुदाय, के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती है या ऐसा माहौल बनाया जाता है जिससे सामाजिक तनाव और वैमनस्य बढ़े, तो यह चिंताजनक और निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार के नेतृत्व में सामाजिक सद्भाव, कानून के शासन और विकास की राजनीति को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को अपनी भाषा और आचरण में संयम बरतना चाहिए, ताकि सरकार, पार्टी और सामाजिक सौहार्द की छवि प्रभावित न हो।
नजरे आलम ने आरोप लगाया कि केवटी थाना, जहाँ विधायक मुरारी मोहन ने धरना दिया, उसी थाना से जुड़े विभिन्न मामलों में विधायक पूर्व में कई बार आरोपित एवं आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की पैरवी करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि थाना प्रशासन कानून के अनुसार कार्य करते हुए सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और किसी अनुचित दबाव में आने से इंकार करता है, तो उसके खिलाफ इस प्रकार का विरोध प्रदर्शन उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि एक विधायक पूरे विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है, न कि किसी एक जाति या धर्म का। उनके अनुसार, विधायक मुरारी मोहन की कथित टिप्पणियों से मुस्लिम समुदाय की भावनाएँ आहत हुई हैं और उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
नजरे आलम ने कहा कि प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए समाज को धार्मिक आधार पर बाँटने या सांप्रदायिक माहौल बनाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता विकास, न्याय और आपसी भाईचारे की राजनीति चाहती है, न कि धर्म और जाति के आधार पर समाज को विभाजित करने वाली राजनीति।
