मधुबनी | 17 अप्रैल 2026
जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा ने शुक्रवार को सौराठ सभागाछी पहुंचकर पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन से संबंधित कार्यों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों से कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि यह कार्य पूरी गंभीरता, पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ किया जाना चाहिए, ताकि जिले की ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रह सके।

️ सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि मधुबनी जिले में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियां हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और ज्ञान की अमूल्य निधि हैं। इन पांडुलिपियों में न केवल इतिहास बल्कि सामाजिक, धार्मिक और बौद्धिक विकास की झलक भी मिलती है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि इन पांडुलिपियों का समय रहते संरक्षण और डिजिटाइजेशन नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह धरोहर नष्ट हो सकती है। इसलिए आधुनिक तकनीक के माध्यम से इन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।
डिजिटाइजेशन से भविष्य की पीढ़ियों को मिलेगा लाभ
डीएम ने बताया कि पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन से इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा आम लोगों के लिए यह ज्ञान-संपदा आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस प्रक्रिया में तकनीकी गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि स्कैनिंग और डिजिटल आर्काइविंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।
आमजनों से सहयोग की अपील
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने जिले के लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिनके पास भी प्राचीन पांडुलिपियां, दस्तावेज या ऐतिहासिक सामग्री उपलब्ध हैं, वे प्रशासन को इसकी जानकारी दें।
उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रशासन उन पांडुलिपियों का सुरक्षित संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन सुनिश्चित करेगा और उन्हें संरक्षित अवस्था में ही वापस किया जाएगा। इस पहल में जनसहभागिता को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया।
ये अधिकारी रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी चंदन कुमार झा, विशेष कार्य पदाधिकारी नितेश कुमार पाठक, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी नीतीश कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
सौराठ सभागाछी जैसे ऐतिहासिक स्थल पर पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन की यह पहल न केवल मधुबनी बल्कि पूरे बिहार की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशासन की यह कोशिश आने वाले समय में ज्ञान और इतिहास को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
