“तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र समेत 64% SEZ इन्हीं राज्यों में, बिहार अब भी इंतजार में”
मधुबनी, 28 मार्च: मधुबनी जिले के पंडौल में सावी ग्लोबल फैशन के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम के दौरान पूर्व उद्योग मंत्री एवं पूर्व विधायक समीर कुमार महासेठ ने बिहार के औद्योगिक विकास को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि बिहार को स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) का दर्जा मिल जाता है, तो राज्य में उद्योगों का तेजी से विस्तार होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे युवाओं और श्रमिकों के पलायन पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
कार्यक्रम में सजे पंडाल में मौजूद उद्यमियों, युवाओं और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मिथिला के बाढ़ प्रभावित इलाकों सहित पूरे बिहार को विशेष आर्थिक क्षेत्र का दर्जा दिलाने के लिए राज्य सरकार को एक बार फिर केंद्र सरकार के समक्ष ठोस प्रस्ताव रखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार में संसाधनों और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन उचित नीतिगत सहयोग के अभाव में राज्य अपेक्षित औद्योगिक विकास से पीछे रह गया है।
महासेठ ने कहा कि नेपाल से आने वाली नदियों के कारण हर वर्ष मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, सहरसा और सीतामढ़ी जैसे जिले बाढ़ की विनाशलीला झेलते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इस “अभिशाप” को “अवसर” में बदला जा सकता है, यदि इन सीमावर्ती और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को स्पेशल इकोनॉमिक जोन में शामिल किया जाए। इससे न केवल क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।
उन्होंने बताया कि SEZ का दर्जा मिलने पर उद्योग स्थापित करने वाले निवेशकों को लगभग 15 वर्षों तक विभिन्न प्रकार के टैक्स में छूट दी जाती है, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होता है। वर्तमान में देश के लगभग 64 प्रतिशत SEZ क्षेत्र तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, गोवा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में केंद्रित हैं, जबकि बिहार इस सूची में काफी पीछे है।
पूर्व मंत्री ने अपने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2005 में विधान परिषद सदस्य रहते हुए उन्होंने पहली बार बिहार को SEZ का दर्जा दिलाने की मांग उठाई थी। इसके बाद 2015 से 2020 के बीच विधानसभा में भी उन्होंने लगातार इस मुद्दे को उठाया।
उन्होंने कहा कि यदि मिथिला क्षेत्र में SEZ की स्थापना होती है, तो यहां मखाना, खादी, टेक्सटाइल, लेदर, गुड़, एथेनॉल जैसे उद्योगों को विशेष बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मधुबनी पेंटिंग, सिक्की कला और पेपरमेसी जैसी पारंपरिक कलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा, जिससे स्थानीय कलाकारों और कारीगरों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
अंत में महासेठ ने कहा कि अब समय आ गया है कि बिहार को उसके अधिकार और संभावनाओं के अनुरूप औद्योगिक पहचान दिलाई जाए, ताकि राज्य आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सके।
