नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, जनाजे में नजरे आलम समेत उमड़ी लोगों की भीड़
मधुबनी: महज 30 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए मो. सनाउल्लाह! दिल्ली में उनके इंतकाल की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव सीमा (नरपत नगर) पहुंची, पूरे इलाके में गम का माहौल छा गया। परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। सबसे दर्दनाक बात यह है कि मरहूम अपने पीछे बेवा और महज दो साल की मासूम बेटी को छोड़ गए हैं, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।
जानकारी के मुताबिक, जिले के सकरी थाना क्षेत्र अंतर्गत सीमा गांव निवासी मो. सनाउल्लाह का परसों दिल्ली में इंतकाल हो गया। उनका पार्थिव शरीर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली से पैतृक गांव लाया गया। आज मगरिब की नमाज के बाद नमाज-ए-जनाजा अदा की गई और फिर गांव के कब्रिस्तान में नम आंखों के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
मरहूम अपने पीछे पत्नी और दो साल की मासूम बेटी के अलावा वालिद मो. सत्तार और वालिदा को छोड़ गए हैं। वह तीन भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे थे। कम उम्र में उनके इस तरह दुनिया से चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
जनाजे में उमड़ी लोगों की भीड़
मो. सनाउल्लाह के जनाजे में जदयू नेता एवं ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के राष्ट्रीय अध्यक्ष नजरे आलम, कुद्दूस सागर, मो. अनवर, अबू बशर रब्बानी और मो. रजी समेत गांव एवं आसपास के इलाकों से बड़ी तादाद में लोग शामिल हुए। सभी ने मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत की और गमजदा परिवार से मिलकर अपनी संवेदनाएं जाहिर कीं।
बताया जाता है कि मरहूम मो. सनाउल्लाह सामाजिक कार्यकर्ता अबू बशर रब्बानी के बड़े भाई के साला लगते थे। उनके असामयिक इंतकाल से रिश्तेदारों और करीबियों में शोक की लहर है।
इस दुखद मौके पर लोगों ने अल्लाह से दुआ की कि मरहूम की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और पीछे छूट गए परिवार को इस मुश्किल घड़ी में सब्र-ए-जमील दे।
