मधुबनी के बाबूबरही से बड़ी खबर: वर्ष 1979 से मान्यता की राह देख रहे झोटन अनंत संस्कृत उच्च विद्यालय, नवानगर के मामले में पटना हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। अदालत ने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड को निर्देश दिया है कि विद्यालय की मान्यता के मामले में नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला लिया जाए।
यह आदेश CWJC No. 592/2026 एवं 735/2026 में न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकल पीठ ने पारित किया है।
1979 से चल रही है मान्यता की लड़ाई
बाबूबरही के नवानगर स्थित इस संस्कृत विद्यालय की स्थापना वर्ष 1979 में डॉ. राधाकांत मिश्र ने संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में बताया गया कि विद्यालय के लिए संस्थापक ने अपनी 1 बीघा 19 कट्ठा निजी जमीन दान की थी। विद्यालय में पक्का भवन भी मौजूद है और संस्थान का संचालन किया जा रहा है।
लेकिन स्थापना के करीब 47 वर्ष बाद भी विद्यालय को मान्यता नहीं मिल सकी।
2014 में आवेदन, 2016 में कार्रवाई का निर्देश
विद्यालय प्रबंधन की ओर से मान्यता के लिए लंबे समय से प्रयास किए जाने की बात अदालत के समक्ष रखी गई। वर्ष 2014 में जिला शिक्षा पदाधिकारी, मधुबनी के समक्ष औपचारिक आवेदन दिया गया।
इसके बाद विद्यालय का भौतिक निरीक्षण भी कराया गया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार निरीक्षण रिपोर्ट में विद्यालय को मान्यता की शर्तें पूरी करने वाला बताया गया था।
इसके बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष निदेशक ने 1 अप्रैल 2016 को पत्र संख्या 349 के जरिए बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड को नियमानुसार मान्यता की कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ सका।
अब हाईकोर्ट ने तय कर दी समय सीमा
सुनवाई के दौरान मान्यता के लिए जिलाधिकारी की रिपोर्ट की आवश्यकता का मुद्दा सामने आया। इसके बाद हाईकोर्ट ने पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित कर दी।
अदालत के निर्देश के मुताबिक—
- याचिकाकर्ताओं को 4 सप्ताह के भीतर नया आवेदन देना होगा।
- आवेदन मिलने के बाद बोर्ड सचिव मधुबनी DM से आवश्यक रिपोर्ट प्राप्त करेंगे।
- रिपोर्ट मिलने के बाद सक्षम प्राधिकारी को 3 महीने के भीतर मान्यता पर अंतिम निर्णय लेना होगा।
शिक्षकों और छात्रों के भविष्य को लेकर बड़ी उम्मीद
करीब पांच दशक से मान्यता का इंतजार कर रहे विद्यालय के लिए हाईकोर्ट का यह आदेश महत्वपूर्ण है। विद्यालय से जुड़े शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि अदालत की तय समय सीमा के कारण वर्षों से लंबित प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
47 साल की प्रतीक्षा के बाद अब सवाल सिर्फ मान्यता का नहीं, बल्कि उस विद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों और शिक्षकों के भविष्य का भी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सबकी नजर अब बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड और मधुबनी प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
