नियोजित शिक्षकों के राज्यकर्मी का दर्जा, वेतन विसंगति दूर करने से लेकर मदरसा शिक्षकों के वेतनमान तक कई मुद्दे शामिल
दरभंगा। बिहार विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, दरभंगा से प्रत्याशी डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने शिक्षकों, पुस्तकालयाध्यक्षों, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय शिक्षकों तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपना संकल्प-पत्र जारी किया है। इसमें नियोजित एवं विशिष्ट शिक्षकों की सेवा, वेतन, स्थानांतरण, पदोन्नति, अवकाश सहित शिक्षा संस्थानों से जुड़े कई विषयों को प्रमुखता दी गई है। उपलब्ध दस्तावेज में उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख है।
डॉ. राय के संकल्प-पत्र में नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों को राज्यकर्मी का दर्जा दिलाने, सभी कोटि के शिक्षकों की सेवा की गणना प्रथम नियुक्ति की तिथि से करने तथा सेवा की निरंतरता का प्रावधान सुनिश्चित कराने की बात कही गई है।
इसके साथ ही शिक्षकों के लिए समान अवकाश की सुविधा, शिक्षकों के आश्रितों के लिए अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति, अंतर-जिला स्थानांतरण की प्रभावी व्यवस्था तथा विशिष्ट परिस्थिति वाले शिक्षकों को उनके मूल विद्यालय में पदस्थापना दिलाने जैसे मुद्दे भी संकल्प-पत्र में शामिल हैं।
परीक्षा एवं स्थानांतरण को लेकर भी प्रस्ताव
संकल्प-पत्र में बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से सभी कोटि के शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति का प्रावधान सुनिश्चित कराने की बात कही गई है। वहीं लंबी दूरी पर पदस्थापन के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे शिक्षकों के लिए आपसी स्थानांतरण की सुविधा देने तथा स्थानांतरण के बाद परीक्षा अवधि समाप्त होने पर सभी शिक्षकों के इच्छित स्थानांतरण का मार्ग प्रशस्त करने की बात कही गई है।
विद्यालयों की समय-सारणी एवं अवकाश में की गई कटौती को वापस करने तथा अवकाश के दिनों में प्रशिक्षण अथवा अन्य कार्यों में लगे शिक्षकों-कर्मचारियों को अतिरिक्त अवकाश देने का प्रस्ताव भी इसमें रखा गया है।
विश्वविद्यालय और महाविद्यालय शिक्षकों के मुद्दे
डॉ. राय के संकल्प-पत्र में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों के वेतन पुनरीक्षण समेत कई मुद्दों का उल्लेख है।
साथ ही विश्वविद्यालयों में नवनियुक्त प्राध्यापकों की सेवा संपुष्टि, शिक्षकों के अनुभव प्रमाण-पत्र एवं सत्यापन के आधार पर वेतन संबंधी प्रक्रिया तथा अन्य लंबित मामलों को लेकर प्रयास करने की बात कही गई है।
वित्त रहित और वित्तरहित संस्थानों पर भी फोकस
संकल्प-पत्र में वित्त रहित माध्यमिक, इंटर एवं डिग्री महाविद्यालयों के लिए अलग-अलग मांगें रखी गई हैं। इनमें प्रबंधन समितियों के गठन और नियमावली लागू करने, शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन भुगतान, लंबित अनुदान के भुगतान तथा संबंधित संस्थानों की समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तरीय प्राधिकार के गठन जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों के मुद्दे भी शामिल
डॉ. सुरेश प्रसाद राय के संकल्प-पत्र में मदरसा एवं संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों के लिए भी कई मांगें रखी गई हैं। इसमें शिक्षकों को समतुल्य पुनरीक्षित वेतनमान देने, पेंशन उपादान लागू कराने, अद्यतन वेतन एवं बकाया भुगतान, रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति तथा मदरसा विद्यालयों में विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति का प्रावधान कराने की बात कही गई है।
इसके अलावा मदरसा एवं संस्कृत विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना और साइकिल योजना लागू कराने तथा 814 कोटि के मदरसा में नियोजित शिक्षकों के लिए वेतनमान का प्रावधान कराने का भी उल्लेख है।
आगे के संघर्ष के लिए कई मुद्दे सूचीबद्ध
संकल्प-पत्र के अंतिम हिस्से में आगामी संघर्ष के मुद्दों के तौर पर नियोजित, विशिष्ट एवं विद्यालय अध्यापक शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतनमान की विसंगति दूर करने, प्रधानाध्यापकों के वेतनमान, शिक्षकों की पदोन्नति, स्थानांतरण नीति, आवास एवं परिवहन भत्ता समेत कई विषयों को शामिल किया गया है।
इसके अलावा संस्कृत, उर्दू, मैथिली, संगीत, नृत्य एवं ललित कला विषयों के शिक्षकों के लिए घोषित मानक मंडल में सुधार, अतिथि एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के नियमित वेतनमान, शिक्षक प्रशिक्षण में आईटीआई और CAT परीक्षा के माध्यम से नामांकन तथा माध्यमिक एवं इंटर विद्यालय के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने जैसी मांगें भी दस्तावेज में दर्ज हैं।
लंबे शैक्षणिक अनुभव का उल्लेख
प्रोफाइल के अनुसार डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने 31 अगस्त 1984 से राजकीय विद्यालयों में विज्ञान शिक्षक के रूप में कार्य किया और 30 अप्रैल 2011 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। दस्तावेज में हजारों विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में योगदान का उल्लेख है। उन्हें विज्ञान शिक्षक के रूप में सम्मानित किए जाने, सामान्य विज्ञान पुस्तक के लेखक होने तथा सामाजिक एवं स्काउटिंग गतिविधियों में सक्रिय योगदान का भी उल्लेख किया गया है।
