मधुबनी/मुजफ्फरपुर। जमीन की जमाबंदी रद्द कराने के लिए ₹5 हजार रिश्वत लेने के करीब 12 साल पुराने मामले में मधुबनी के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी नारायणजी झा को विशेष निगरानी अदालत ने दोषी करार दिया है। अदालत अब सजा के बिंदु पर 27 अगस्त को सुनवाई करेगी।
मामला वर्ष 2014 का है। उस समय नारायणजी झा मधुबनी जिले के रहिका अंचल के हल्का नंबर-3 में राजस्व कर्मचारी के पद पर तैनात थे। आरोप था कि जमीन की जमाबंदी रद्द कराने से संबंधित रिपोर्ट देने के एवज में उन्होंने शिकायतकर्ता से ₹5 हजार रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले का सत्यापन किया और कार्रवाई के लिए टीम गठित की। 19 मई 2014 को शिकायतकर्ता ₹5 हजार की रिश्वत लेकर मधुबनी शहर के लहेरियागंज स्थित नारायणजी झा के आवास पर पहुंचा। जैसे ही रिश्वत की राशि लेने की बात सामने आई, निगरानी की टीम ने उन्हें पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से ₹32 हजार अतिरिक्त राशि भी बरामद होने की बात सामने आई थी।
करीब 12 वर्षों तक चले इस मामले में विशेष लोक अभियोजक की ओर से अदालत में कुल 9 गवाह पेश किए गए। सेशन ट्रायल के बाद विशेष कोर्ट निगरानी के न्यायाधीश दशरथ मिश्र ने नारायणजी झा को दोषी करार दिया।
अब इस मामले में 27 अगस्त को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी। इसके बाद अदालत द्वारा दोषी राजस्व कर्मचारी को सजा सुनाई जाएगी।
