Monday, June 22, 2026
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राजनगर पैलेस को फिर मिलेगा शाही गौरव! राजपरिवार की सहमति पर इंटैक करेगा विरासत का पुनरुद्धार

 

मधुबनी की सांस्कृतिक धरोहर बचाने की बड़ी पहल, इंटैक मधुबनी चैप्टर का हुआ शुभारंभ

मधुबनी। मिथिला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में मधुबनी से एक बड़ी उम्मीद जगी है। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) के मधुबनी चैप्टर के शुभारंभ अवसर पर इंटैक के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंह ठाकुर ने कहा कि यदि राजनगर पैलेस के संपत्तिधारक और राजपरिवार तैयार हों, तो इंटैक इस ऐतिहासिक धरोहर को उसके पुराने शाही स्वरूप और गौरव के साथ पुनर्जीवित करने के लिए तैयार है।

ग्रीन ऑनियन रेस्टुरेंट के सभागार में आयोजित “मधुबनी जिले की सांस्कृतिक विरासत” विषयक सेमिनार का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में जिले के पुरातत्वविदों, साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों और विरासत प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि इंटैक वर्ष 1984 से देशभर की ऐतिहासिक इमारतों, सांस्कृतिक धरोहरों और पुरातात्विक अवशेषों के संरक्षण के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजनगर पैलेस केवल एक भवन नहीं, बल्कि मिथिला के गौरवशाली इतिहास, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इसके संरक्षण के लिए समाज, प्रशासन, विशेषज्ञों और संपत्तिधारकों को मिलकर आगे आना होगा।

उन्होंने इंटैक मधुबनी चैप्टर की स्थापना को जिले के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए डॉ. अभिषेक कुमार और प्रतीक प्रभाकर के प्रयासों की सराहना की। कहा कि मधुबनी की विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यह चैप्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में डॉ. शिवकुमार मिश्र की पुस्तक ‘बिहार की प्रमुख सूर्य प्रतिमाएँ’, हृदय नारायण झा की ‘छठ लोक गीत’ और सौम्या आँचल द्वारा संपादित पुस्तक ‘छठ पूजा’ का लोकार्पण भी किया गया।

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी नीतीश कुमार ने कहा कि इंटैक का संरक्षण कार्यों में उल्लेखनीय इतिहास रहा है। मधुबनी में मौजूद ऐतिहासिक स्थलों, प्राचीन मूर्तियों, लोककला, मंदिरों और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के लिए अब योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत है।

विरासत संरक्षण के लिए सतत सक्रिय अमल कुमार झा ने जिले में मौजूद धरोहरों की स्थिति और संरक्षण की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। इंटैक बिहार चैप्टर के कन्वेनर भैरव लाल दास ने कहा कि मधुबनी चैप्टर का गठन लंबे समय से अपेक्षित था और अब जिले के बुद्धिजीवियों को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।

इंटैक बिहार चैप्टर के को-कन्वेनर डॉ. शिवकुमार मिश्र ने कहा कि मधुबनी के कई गांवों में पुरातात्विक महत्व की प्राचीन मूर्तियां और अवशेष मौजूद हैं। इनके संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता, दस्तावेजीकरण और सामूहिक प्रयास जरूरी है।

सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे डॉ. नरेन्द्र नारायण सिंह निराला ने कहा कि मधुबनी का इतिहास केवल स्थानीय इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विरासत को बचाना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रतीक प्रभाकर ने दिया, जबकि संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक कुमार ने किया। मौके पर पद्मश्री शिवन पासवान समेत जिले के अनेक साहित्यकार, कलाकार, शिक्षाविद और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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