Saturday, May 23, 2026
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डीएम साहेब का आदेश है, थाना चलिए…” — निजी तालाब विवाद में पत्रकार को घंटों थाने में बैठाने का आरोप, मधुबनी में मचा हड़कंप

नगर निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल, तालाब मालिक बोले — “गलती प्रशासन की और सफाई आम जनता दे?”

Madhubani में जलजमाव, अतिक्रमण और निजी तालाबों में नगर निगम द्वारा पानी व कचरा गिराए जाने को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शनिवार को वार्ड संख्या 8 स्थित मुरली मनोहर तालाब और शिव सागर तालाब क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई ने नया मोड़ ले लिया, जब तालाब मालिक एवं पत्रकार अजय धारी सिंह को पुलिस द्वारा “डीएम साहेब का आदेश” बताकर थाना बुलाए जाने का आरोप लगा।

मिली जानकारी के अनुसार, हल्की बारिश के बाद एनएच-527(A) गौशाला रोड पर जलजमाव की स्थिति बन गई थी। इसके बाद Umesh Kumar Bharti अपने अधिकारियों और कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। नगर आयुक्त ने जेसीबी से अवरुद्ध जलनिकासी मार्ग को खुलवाया और क्षेत्र का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने शिव सागर तालाब के मालिक अजय धारी सिंह से मुरली मनोहर तालाब से निकलने वाले पानी को लेकर पूछताछ की। अजय धारी सिंह का कहना है कि उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे न तो तालाब में पानी डालते हैं और न ही निकासी रोकते हैं। इसके बाद नगर आयुक्त ने वार्ड 8, 14 और 15 के विभिन्न इलाकों — रविदास मोहल्ला, बाबू साहेब चौक, शंकर चौक, पीएनबी कॉलोनी और गौशाला मोहल्ला — का भ्रमण कर जलनिकासी व्यवस्था की जानकारी ली।

नगर आयुक्त गए और पुलिस पहुंच गई”
अजय धारी सिंह ने आरोप लगाया कि करीब दो घंटे तक क्षेत्र भ्रमण और बातचीत के बाद जब नगर आयुक्त वापस चले गए, तो थोड़ी देर बाद पुलिस उनके घर पहुंच गई। पुलिसकर्मियों ने उन्हें और तालाब से जुड़े लोगों को थाना चलने को कहा। जब कारण पूछा गया, तो कथित तौर पर जवाब मिला — “डीएम साहेब का आदेश है।”
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने नगर आयुक्त Umesh Kumar Bharti से फोन पर बात की, तब भी उन्हें थाना जाकर अपनी बात रखने की सलाह दी गई।

थाने में ढाई घंटे बैठाने का आरोप
अजय धारी सिंह के अनुसार, Madhubani Town Police Station पहुंचने के बाद उनसे नाम, पता और पेशे की जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि पत्रकार होने की जानकारी देने के बाद थाना प्रभारी का रवैया कुछ बदला, लेकिन उनसे तालाब में काम करने वाले सभी लोगों का आधार और विवरण मांगा गया।

उन्होंने कहा कि आधार की छायाप्रति तत्काल उपलब्ध नहीं होने के बावजूद उन्होंने सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का भरोसा दिया, लेकिन इसके बाद भी उन्हें करीब ढाई घंटे तक थाने में बैठाए रखा गया।

“जनता सेवक हैं या मालिक?” — प्रशासन पर उठे सवाल
अजय धारी सिंह ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी आम नागरिक की गलती है तो पहले नोटिस देकर जवाब मांगा जाना चाहिए। बिना स्पष्ट कारण घंटों थाने में बैठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन या नगर निगम के कर्मियों की गलती से समस्या उत्पन्न हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी आम लोगों पर नहीं डाली जानी चाहिए।

उन्होंने जिला प्रशासन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “डीएम साहेब का समय जितना मूल्यवान है, जनता का समय भी उतना ही मूल्यवान है। जनता के सेवक को जनता की बात भी सुननी चाहिए।”

शहर में चर्चा का विषय बना मामला
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मधुबनी में नगर निगम की कार्यप्रणाली, जलनिकासी व्यवस्था और प्रशासनिक रवैये को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश और बाढ़ से पहले शहर की नालियों और तालाबों की समुचित सफाई व योजना जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को परेशानी न झेलनी पड़े।

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