मिथिला पर्यटन को नई उड़ान, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान होगी मजबूत
मधुबनी | 10 मई 2026
मधुबनी जिले के धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। हरलाखी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक विश्वामित्र स्थान एवं प्रसिद्ध कल्याणेश्वर महादेव मंदिर के विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्य हेतु बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (BSTDC) द्वारा टेंडर जारी कर दिया गया है। इस निर्णय को जिले के पर्यटन विकास के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
जिला प्रशासन मधुबनी द्वारा इन दोनों धार्मिक स्थलों के संरक्षण, विकास और पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के उद्देश्य से विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था। इस प्रस्ताव पर तत्कालीन पर्यटन एवं कला-संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने विशेष रुचि लेते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कराई। इसके बाद अब परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
करोड़ों की लागत से होगा विकास कार्य
जारी टेंडर के अनुसार हरलाखी स्थित विश्वामित्र आश्रम के विकास एवं सौंदर्यीकरण पर लगभग 13 करोड़ 27 लाख 63 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं कल्याणेश्वर महादेव मंदिर के रिनोवेशन एवं पर्यटन विकास कार्य पर लगभग 13 करोड़ 60 लाख 99 हजार रुपये की राशि व्यय होगी।
परियोजना के तहत दोनों स्थलों पर आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसमें आकर्षक प्रवेश द्वार, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, पार्किंग, पर्यटक सुविधा केंद्र एवं सुगम आवागमन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
धार्मिक आस्था और पौराणिक महत्व का केंद्र
हरलाखी स्थित विश्वामित्र स्थान को धार्मिक एवं पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यह महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि रही है, जिसके कारण यहां वर्षों से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। वहीं कल्याणेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और लोकआस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने कहा कि दोनों धार्मिक स्थलों के विकास से न केवल मधुबनी जिले में पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा, बल्कि संपूर्ण बिहार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे यहां आने वाले लोगों की संख्या में भी वृद्धि होने की संभावना है।
डीएम ने बताया कि इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी।
मधुबनी बनेगा धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र
जिला प्रशासन का मानना है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा होने के बाद मधुबनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा। विश्वामित्र स्थान और कल्याणेश्वर महादेव मंदिर का विकास मिथिला क्षेत्र के पर्यटन मानचित्र को मजबूत करने के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊंचाई मिलेगी।
