मधुबनी | 18 अप्रैल 2026
मधुबनी जिले के ऐतिहासिक धरोहर स्थल बलिराजगढ़ में चल रहे उत्खनन कार्य की प्रगति को लेकर जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने शनिवार को वर्चुअल माध्यम से समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने और वैज्ञानिक पद्धति के अनुरूप उत्खनन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
️ बिहार का सबसे बड़ा पुरातात्विक स्थल
बलिराजगढ़ करीब 175 एकड़ क्षेत्र में फैला बिहार का सबसे बड़ा पुरातात्विक स्थल माना जाता है। यह बाबूबरही प्रखंड के भूपट्टी और पचरुखी पंचायतों की सीमा में स्थित है। यह स्थल अपने भीतर कई ऐतिहासिक रहस्यों और प्राचीन सभ्यता के साक्ष्यों को समेटे हुए है।
एएसआई द्वारा वैज्ञानिक उत्खनन जारी
यहां वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से खुदाई का कार्य किया जा रहा है। बलिराजगढ़ को एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता और भी बढ़ गई है।
इतिहास और संस्कृति के खुलेंगे नए पन्ने
प्रशासन का मानना है कि इस उत्खनन से मिथिला की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। नई खोजों से न केवल इतिहास के अनछुए पहलुओं का खुलासा होगा, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की भी संभावना है।
निष्कर्ष:
बलिराजगढ़ में चल रहा उत्खनन कार्य मधुबनी ही नहीं, पूरे बिहार के लिए ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशासन की सतत निगरानी और वैज्ञानिक खुदाई से आने वाले समय में कई अहम ऐतिहासिक रहस्यों से पर्दा उठने की उम्मीद है।
