परिजनों ने ट्रैफिक पुलिस की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग
दरभंगा। शहर में नो एंट्री के बावजूद भारी वाहनों के प्रवेश का आरोप एक बार फिर सामने आया है। शुक्रवार सुबह करीब 9:25 बजे तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से बाइक सवार शिक्षक अहमद अली (44) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। आक्रोशित स्थानीय लोगों और परिजनों ने सड़क जाम कर दिया, जिससे कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा।
मृतक की पहचान केवटी थाना क्षेत्र के बाढ़ समैला निवासी अहमद अली के रूप में हुई है। वे पेशे से शिक्षक थे। परिजनों के अनुसार, अहमद अली अपनी बाइक BR07BE-7815 से एक रिश्तेदार की मैयत में शामिल होने के बाद दरभंगा शहर से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए तेज रफ्तार ट्रक BR01GF-5987 ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि अहमद अली की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रक नो एंट्री के बावजूद शहर में प्रवेश कर रहा था।
हादसे के बाद सड़क पर उतरे लोग, चार थानों की पुलिस पहुंची
घटना की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय थाना, सदर थाना, मब्बी थाना और केवटी थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। हादसे के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और मृतक के परिजन घटनास्थल पर जमा हो गए और सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता एवं जदयू नेता नजरे आलम भी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा पुलिस के वरीय अधिकारियों से फोन पर बातचीत की।
सदर एसडीपीओ-1 सहित संबंधित पुलिस अधिकारियों से भी मामले को लेकर बातचीत हुई। पुलिस अधिकारियों, स्थानीय लोगों, नजरे आलम और मृतक के परिजनों के बीच बातचीत के बाद अधिकारियों की ओर से उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
इसके बाद परिजनों ने लिखित आवेदन देकर अपना बयान दर्ज कराया। सहमति बनने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए विश्वविद्यालय थाना की पुलिस के सुपुर्द किया गया।
ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल, पुलिस की भूमिका की जांच की मांगl
हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि नो एंट्री के बावजूद भारी वाहनों को शहर में प्रवेश करने दिया जाता है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि ट्रैफिक ड्यूटी में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से छोटी रकम की वसूली के बाद भारी वाहनों को प्रवेश की अनुमति दी जाती है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
परिजनों की मांग है कि घटना के समय ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जाए और यदि किसी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही ट्रैफिक डीएसपी की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।
परिजनों का कहना है कि अगर नो एंट्री का नियम सख्ती से लागू होता तो शायद अहमद अली की जान बच सकती थी।
ट्रक चालक और मालिक पर सख्त कार्रवाई की मांग
मृतक के परिजनों ने दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक चालक और मालिक के खिलाफ हत्या सहित उचित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि अहमद अली के निधन से उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है। उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और परिवार के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
परिजनों ने सरकार से उचित मुआवजा देने और परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की है।
मांग पूरी नहीं हुई तो फिर होगा सड़क जाम
परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि केवल आश्वासन से मामला खत्म नहीं होगा। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग पूरी होनी चाहिए।
लोगों ने कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से पहल नहीं की तो वे दोबारा सड़क जाम कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
