Thursday, November 5, 2026
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Madhubani Crime: पिता ने की थी 4 सैन्यकर्मियों की हत्या, अब बेटे ASI पर ग्रामीणों पर गोली चलाने का आरोप; 12 टीमें कर रहीं तलाश

 

मधुबनी/बाबूबरही। मधुबनी के बलिराजगढ़ में हुए सनसनीखेज गोलीकांड ने पूरे इलाके को हिला दिया है। पुलिस के एक निलंबित ASI चंद्रमोहन सिंह पर ग्रामीणों पर सर्विस पिस्टल से गोली चलाने का गंभीर आरोप है। इस घटना में अशोक यादव की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य ग्रामीण घायल हुए हैं। घटना के बाद से आरोपी ASI फरार है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

इस मामले में अब एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह के पिता स्वर्गीय रविंद्र सिंह भी सेना में जवान थे और उनके खिलाफ अपने सेवाकाल के दौरान चार सैन्यकर्मियों की हत्या के मामले में सजा होने की बात सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पिता ने करीब 14 वर्ष जेल की सजा काटी थी। पिछले वर्ष उनका निधन हो गया।

बेटे पर अब ग्रामीणों पर गोली चलाने का आरोप

बलिराजगढ़ में दो नवंबर की देर रात हुई घटना के बाद आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस के अनुसार, वह बलिराजगढ़ में पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा के लिए बनाए गए पुलिस पिकेट में तैनात था।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक घटना के दौरान वह एक घर में गया था। बाद में ग्रामीणों ने उसे वहां पकड़कर रोक दिया। इसी दौरान बाहर निकलने की कोशिश में उसने कथित तौर पर अपनी सर्विस पिस्टल से गोली चला दी।

गोलीबारी में अशोक यादव की मौत हो गई, जबकि विजेंद्र यादव उर्फ विजुन यादव, धनिकलाल यादव और फूलो देवी घायल हुए। घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

12 विशेष टीमें, नेपाल तक पहुंची तलाश

घटना के बाद पुलिस ने आरोपी ASI को पकड़ने के लिए अभियान तेज कर दिया है। मधुबनी पुलिस के साथ बिहार STF भी उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस की 12 विशेष टीमें बनाई गई हैं, जो मधुबनी से लेकर बक्सर और नेपाल सीमा तक संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

पुलिस ने उसके रिश्तेदारों और करीबियों के यहां भी दबिश दी है। तकनीकी टीमों की मदद से उसकी संभावित लोकेशन और संपर्कों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

पैतृक गांव चिल्हारी में भी छापेमारी

आरोपी ASI का पैतृक गांव चिल्हारी, बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडल के नया भोजपुर थाना क्षेत्र में बताया गया है। मधुबनी की घटना के बाद वहां भी पुलिस ने उसके घर और संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की, लेकिन अभी तक उसका सुराग नहीं मिला है।

ग्रामीणों के अनुसार, चंद्रमोहन सिंह चार भाइयों में सबसे छोटा है। वर्ष 2010 में उसकी बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर नियुक्ति हुई थी। बाद में पदोन्नति के बाद वह ASI बना।

पिता का अतीत भी चर्चा में

मामले में सबसे ज्यादा चर्चा आरोपी ASI के पिता रविंद्र सिंह के पुराने आपराधिक मामले को लेकर हो रही है। रिपोर्टों के अनुसार, रविंद्र सिंह सेना में जवान थे और सेवाकाल के दौरान चार सैन्यकर्मियों की हत्या के मामले में उन्हें सजा हुई थी।

बताया गया है कि सजा काटने के बाद वह गांव लौटे थे और पिछले वर्ष उनका निधन हो गया। अब बेटे चंद्रमोहन सिंह पर मधुबनी में ग्रामीणों पर गोली चलाने और हत्या का आरोप लगने के बाद यह पुराना मामला फिर चर्चा में आ गया है।

पुलिस ने ASI को किया निलंबित

घटना के बाद चंद्रमोहन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उसके खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया है।

SSP योगेंद्र कुमार ने कहा है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है और मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आखिर उस रात हुआ क्या था?

पुलिस के अनुसार, दो नवंबर की रात करीब 11:53 बजे बलिराजगढ़ के धत्ता टोल में पुलिस को सूचना मिली कि एक पुलिस अधिकारी को ग्रामीणों ने घर में बंद कर रखा है। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो वहां गोली लगने से कई लोग घायल मिले।

प्राथमिकी में आरोप है कि ASI ने बाहर निकलने की कोशिश के दौरान अपनी सर्विस पिस्टल से गोली चलाई। इसी गोलीबारी में अशोक यादव की जान चली गई और तीन अन्य ग्रामीण घायल हो गए।

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है। आरोपी ASI फरार है और पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं। एक तरफ बलिराजगढ़ गोलीकांड की जांच आगे बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ आरोपी के पिता के पुराने मामले ने इस पूरे प्रकरण को और भी चर्चा में ला दिया है।

नोट: मैंने “दो ग्रामीणों की हत्या” को सीधे तथ्य की तरह नहीं लिखा है, क्योंकि उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में अभी एक ग्रामीण की मौत और तीन के घायल होने की पुष्टि मिल रही है। आपकी दी हुई हेडिंग में “दो ग्रामीणों के कत्ल” लिखा है, लेकिन प्रकाशित पुलिस/समाचार रिपोर्टों से यह संख्या पुष्ट नहीं हुई।

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