फैक्ट्री में मजदूर बनकर पहुंचे पत्रकार, तेजाब और यूरिया के इस्तेमाल का सनसनीखेज आरोप; 4 राज्यों तक फैले नेटवर्क की बात आई सामने, खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
बिहार: बाजार में मिलने वाला पनीर आपकी सेहत बना रहा है या धीरे-धीरे आपको बीमार कर रहा है? बिहार से सामने आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने खाद्य पदार्थों में मिलावट के खतरनाक खेल को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
दैनिक भास्कर की एक पड़ताल में कथित तौर पर नकली पनीर बनाने वाली फैक्ट्री और उसके सप्लाई नेटवर्क से जुड़े चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कारोबार में रोजाना करीब 5,000 किलो पनीर की सप्लाई की जाती है। इतना ही नहीं, इस नेटवर्क के चार राज्यों तक फैले होने का भी दावा किया गया है।
मजदूर बनकर फैक्ट्री पहुंचे पत्रकार, सामने आई चौंकाने वाली बातेंi रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे कारोबार की हकीकत जानने के लिए पत्रकार मजदूर बनकर फैक्ट्री पहुंचे। वहां कारोबार से जुड़े लोगों से बातचीत के दौरान कथित तौर पर पनीर बनाने के तरीके और सप्लाई नेटवर्क को लेकर कई हैरान करने वाली बातें सामने आईं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि कथित तौर पर पनीर तैयार करने में तेजाब और यूरिया जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि और प्रयोगशाला जांच जरूरी है।
चार राज्यों तक फैला नेटवर्क, रोजाना हजारों किलो सप्लाई!
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह कारोबार सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका नेटवर्क चार राज्यों तक फैला हुआ है। रोजाना करीब पांच हजार किलो पनीर की सप्लाई का दावा इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।
अगर ये दावे जांच में सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ मिलावटखोरी नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ का गंभीर मामला होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल-आखिर कार्रवाई कब होगी?
आम आदमी बाजार से पनीर खरीदते समय यही भरोसा करता है कि उसे शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ मिल रहा है। लेकिन इस तरह के खुलासे उस भरोसे को झकझोर देते हैं।
अब सवाल है कि खाद्य सुरक्षा विभाग इस कथित नेटवर्क की जांच कब करेगा? क्या संबंधित फैक्ट्रियों से पनीर के नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला जांच कराई जाएगी? और अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर कब कार्रवाई होगी?
फिलहाल इस मामले में निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक कार्रवाई बेहद जरूरी है। लोगों की थाली तक पहुंचने वाले खाने की शुद्धता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
