Tuesday, October 27, 2026
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नजरे आलम का विपक्ष पर बड़ा हमला: बोले- पार्टी अनुशासन से ऊपर कोई नहीं, JDU को कमजोर समझने की भूल न करे विरोधी!

अनंत सिंह पर कार्रवाई को बताया पार्टी का आंतरिक मामला, नीतीश कुमार के नेतृत्व और संजय कुमार झा की भूमिका पर उठ रहे सवालों का दिया जवाब
दरभंगा। बिहार की सियासत में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अंदरूनी मामलों को लेकर जारी चर्चा के बीच जेडीयू नेता नजरे आलम ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी अनुशासन से ऊपर कोई नहीं है और जेडीयू को कमजोर समझने की भूल विपक्ष को नहीं करनी चाहिए। अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई, नीलम देवी से जुड़े फैसलों और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि राजनीतिक बयानबाजी से किसी दल की ताकत तय नहीं होती।

नजरे आलम के इस बयान से बिहार की सियासत में जेडीयू के संगठन, नेतृत्व और भविष्य को लेकर चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

अनंत सिंह पर कार्रवाई: पार्टी अनुशासन सर्वोपरि
नजरे आलम ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में संगठनात्मक अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण होता है। कोई नेता कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, वह पार्टी की नीतियों, नेतृत्व और नियमों से ऊपर नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि पार्टी की नीतियों के विपरीत काम करता है या पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होता है, तो संगठन को नियमानुसार कार्रवाई करने का अधिकार है। अनंत सिंह के खिलाफ छह साल के निष्कासन की कार्रवाई और नीलम देवी से जुड़े पद व आवास संबंधी फैसलों को भी तथ्यों, नियमों और आधिकारिक निर्णयों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा सदस्यता समाप्त करने जैसे संवैधानिक मामलों में फैसला संबंधित कानूनों और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के अनुसार ही होना चाहिए।

नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सवाल उठाने वालों को मिलेगा जवाब
जेडीयू नेता ने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सवाल उठाने वालों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की राजनीतिक पहचान उनके लंबे अनुभव, विकास कार्यों, प्रशासनिक फैसलों और बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका से बनी है।

नजरे आलम के मुताबिक, किसी नेता के राजनीतिक प्रभाव या बयानों के आधार पर जेडीयू को कमजोर बताना सही नहीं है। पार्टी की ताकत केवल किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसका संगठन, कार्यकर्ता, नेतृत्व और जनता के बीच उसकी राजनीतिक भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि पार्टी के आंतरिक घटनाक्रम को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना और हर कार्रवाई को जेडीयू की कमजोरी बताना राजनीतिक भ्रम फैलाने जैसा है।
संजय कुमार झा को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप
नजरे आलम ने जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संजय कुमार झा पार्टी संगठन को मजबूत करने, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाने तथा गठबंधन की राजनीति को प्रभावी बनाने के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि संजय कुमार झा को लेकर पार्टी के भीतर नेतृत्व संबंधी भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है। नजरे आलम ने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के किसी नेता पर पार्टी को अपने नियंत्रण में लेने या नेतृत्व को कमजोर करने का आरोप लगाना उचित नहीं है।
उनके अनुसार, जेडीयू में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने वाले नेताओं की भूमिका को राजनीतिक आरोपों के बजाय उनके काम के आधार पर देखा जाना चाहिए।

निशांत कुमार के भविष्य पर भी बोले नजरे आलम
जेडीयू के भविष्य और निशांत कुमार की राजनीतिक भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं पर नजरे आलम ने कहा कि राजनीतिक भविष्य का फैसला केवल अटकलों के आधार पर नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि पार्टी का भविष्य उसके नेतृत्व, संगठनात्मक फैसलों, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता के विश्वास से तय होगा। संजय कुमार झा सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे में अभी से जेडीयू के कमजोर होने या उसके राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लगाना जल्दबाजी होगी।

विपक्ष को दी नसीहत: जेडीयू की चिंता छोड़ अपने संगठन पर ध्यान दे
नजरे आलम ने विपक्षी दलों को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें जेडीयू के आंतरिक मामलों पर बयानबाजी करने के बजाय अपने संगठन और जनाधार को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल की असली ताकत बयानबाजी से नहीं, बल्कि जनता के बीच उसकी सक्रियता, संगठन की मजबूती और जनहित के मुद्दों पर उसके काम से तय होती है।

नजरे आलम ने विश्वास जताया कि जेडीयू नीतीश कुमार की राजनीतिक दिशा और विचारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासन बनाए रखने और संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

नजरे आलम का साफ संदेश—JDU को कमजोर आंकना विपक्ष की भूल
अपने बयान के अंत में नजरे आलम ने कहा कि जेडीयू में कोई भी नेता पार्टी और उसके अनुशासन से बड़ा नहीं है। नीतीश कुमार का नेतृत्व, संजय कुमार झा का संगठनात्मक अनुभव और समर्पित कार्यकर्ताओं की मेहनत पार्टी की ताकत है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को राजनीतिक भविष्यवाणियां करने और नकारात्मक नैरेटिव गढ़ने के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों पर राजनीति करनी चाहिए।

नजरे आलम का यह बयान ऐसे समय आया है, जब जेडीयू के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई, नेतृत्व और भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। अब देखना होगा कि विपक्ष इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देता है और बिहार की राजनीति में यह बहस आगे क्या मोड़ लेती है।

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