कोडीन कफ सिरप से लेकर ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम तक की खेप मिलने का दावा, 16 सदस्यीय टीम करेगी जांच; नकली दवाओं के नेटवर्क को खंगाल रहा ड्रग विभाग
पटना। बिहार में नशीली और नकली दवाओं के अवैध कारोबार को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। अब दवाओं की तस्करी के लिए कूरियर नेटवर्क के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में पटना की करीब 12 संदिग्ध कूरियर कंपनियां ड्रग विभाग के रडार पर हैं। आरोप है कि पार्सलों में दवाओं की पहचान छिपाकर उन्हें दूसरे सामान के नाम पर अलग-अलग जगहों पर भेजा जा रहा था।
कूरियर पार्सलों में मिलीं नशीली दवाएं!
औषधि विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान कई पार्सलों से कोडीन युक्त कफ सिरप, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी नशीली दवाएं मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा नामी कंपनियों के नाम पर तैयार की गई कुछ संदिग्ध नकली दवाएं भी बरामद होने की बात कही गई है।
प्रारंभिक जांच में पटना के कंकड़बाग, पत्रकार नगर, राजेंद्र नगर, ट्रांसपोर्ट नगर और फुलवारीशरीफ स्थित कूरियर गोदामों का नाम सामने आया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और दवाओं की सप्लाई कहां-कहां की जा रही थी।
16 सदस्यीय टीम करेगी बड़ा खुलासा?
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्टेट ड्रग कंट्रोलर नित्यानंद क्रिशलय ने 16 सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की है। टीम में ड्रग इंस्पेक्टरों के साथ पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।
टीम को संदिग्ध कूरियर कंपनियों के गोदामों, बुकिंग सेंटरों और ट्रांजिट हब की जांच करने का निर्देश दिया गया है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि दवाओं की सप्लाई कहां से हो रही थी और इस कारोबार में किन लोगों की भूमिका है।
दवाओं की जगह लिखा जा रहा था कॉस्मेटिक और फूड सप्लीमेंट!
जांच के दौरान यह आशंका भी सामने आई है कि कुछ पार्सलों में दवाओं की वास्तविक जानकारी छिपाकर उन्हें सामान्य सामान, कॉस्मेटिक या फूड सप्लीमेंट के नाम पर बुक किया जा रहा था। कुछ जगहों पर रात में पार्सलों की बुकिंग और डिस्पैच किए जाने की सूचना भी मिली है।
जांच एजेंसियों को शक है कि नकली दवाओं से जुड़े गिरोह छोटे गोदामों के जरिए दवाओं की खेप तैयार कर उन्हें छोटे-छोटे पार्सलों में दूसरे राज्यों तक भेज रहे थे।
बिहार से यूपी, बंगाल और झारखंड तक नेटवर्क की आशंका
जांच में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड तक दवाओं की सप्लाई किए जाने की आशंका सामने आई है। सीमावर्ती इलाकों के रास्ते नेपाल तक नशीली दवाएं भेजे जाने की सूचना की भी जांच की जा रही है।
विभाग को कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा बिना जरूरी दस्तावेजों के दवाएं मंगवाकर ऊंचे दामों पर बेचने की शिकायतें भी मिली हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
अब कूरियर कंपनियों पर हो सकती है कार्रवाई
ड्रग विभाग संदिग्ध कूरियर कंपनियों को नोटिस जारी करने की तैयारी में है। उनसे पूछा जाएगा कि दवाओं वाले पार्सल किन दस्तावेजों के आधार पर बुक किए गए थे। जांच में नियमों का उल्लंघन साबित होने पर लाइसेंस रद्द करने और संबंधित संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने जैसी कार्रवाई हो सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कूरियर के जरिए चल रहे इस कथित नेटवर्क के पीछे कौन है और इसकी सप्लाई चेन कितनी दूर तक फैली हुई है? जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
