कुसमार। पीर-ए-तरीकत एवं सूफी संत हजरत मौलाना महमूदुल हसन ग्रौलवी दामत बरकातुहुमुल आलिया, खलीफा-ए-मुजाज हजरत मौलाना मुहम्मद अहमद प्रतापगढ़ी दामत बरकातुहुमुल आलिया के कसमार आगमन पर क्षेत्र में धार्मिक एवं इस्लाही कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
डॉक्टर फारूक दिलकश कुसमारी के अनुसार, 25 अगस्त को डूबरबोना स्थित जामा मस्जिद में हजरत की इस्लाही मजलिस आयोजित हुई। इसके बाद 26 अगस्त को सुबह करीब 10 बजे कसमार स्थित मदरसा नुमानिया रियाजुल उलूम में दुआइया कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में गांव के बुजुर्ग, जिम्मेदार लोग एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
वर्षों बाद फिर शुरू हुआ मदरसे का सफर
बताया गया कि मदरसा नुमानिया रियाजुल उलूम की नींव वर्ष 1996 में मरहूम हजरत मौलाना अनवर अली कासमी ने हजरत मौलाना वली अहमद, अमीर-ए-शरीअत बिहार व उड़ीसा के हाथों रखवाई थी। एक समय मदरसा पूरी शान-ओ-शौकत के साथ संचालित होता था और करीब 60 बच्चे यहां शिक्षा प्राप्त करते थे।
बाद में परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहने के कारण मदरसा बंद हो गया और बच्चे भी चले गए। मदरसे की कच्ची दीवारें बरसात के दौरान गिर गईं। इसके बाद कसमार के कुछ युवाओं ने मौलाना मुजीबुर्रहमान के साथ मिलकर मदरसे को दोबारा शुरू करने की पहल की। पूरे गांव की बैठक कर राय ली गई और सर्वसम्मति से मदरसे को पक्का बनाने का निर्णय लिया गया।
ग्रामीणों के सहयोग से चंदा जुटाने का सिलसिला शुरू हुआ और निर्माण कार्य आगे बढ़ा। अब मदरसे की छत की ढलाई पूरी होने के बाद एक शिक्षक की नियुक्ति कर दोबारा शैक्षणिक गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। हजरत मौलाना महमूदुल हसन ग्रौलवी की मौजूदगी में दुआइया कार्यक्रम के साथ मदरसे के पुनः संचालन का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
धार्मिक गतिविधियों को लेकर मौलाना मुजीबुर्रहमान की सराहना
इस मौके पर मौलाना मुजीबुर्रहमान की धार्मिक एवं सामाजिक कोशिशों की भी सराहना की गई। बताया गया कि उन्होंने पूरे क्षेत्र में हजरत के इस्लाही कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को दीन-ए-मुहम्मदी से जोड़ने की पहल की। उनके प्रयासों से बड़ी संख्या में लोग धार्मिक गतिविधियों और नियमित अमल से जुड़े हैं।
कार्यक्रम में मौलाना मुजीबुर्रहमान, मास्टर महताब आलम, हाफिज तौकीर, मुफ्ती मुश्ताक अहमद और मास्टर रियाज सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
जनसेवा केंद्र का भी हुआ उद्घाटन
हजरत मौलाना महमूदुल हसन ग्रौलवी ने कसमार निवासी मास्टर रियाज के पुत्र द्वारा शुरू किए गए ग्राहक सेवा केंद्र का भी उद्घाटन किया। इस दौरान केंद्र की तरक्की और कारोबार में खैर-ओ-बरकत के लिए दुआ की गई।
इसके बाद हजरत ने गांव के महत्वपूर्ण जिम्मेदार व्यक्ति सुल्तान अहमद सेठ के हॉस्पिटल हेल्थ केयर पहुंचकर डॉक्टर मनीष के चैंबर में बैठकर अस्पताल की तरक्की और मरीजों की सेहत एवं शिफा के लिए दुआ की।
दोपहर में हजरत ने आराम करने के बाद जुमे की नमाज अदा की और मास्टर रियाज के यहां भोजन किया। इसके बाद वे डकही के लिए रवाना हुए, जहां शाम बाद इस्लाही कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
धार्मिक संगति से बदली जिंदगी
डॉक्टर फारूक दिलकश ने कहा कि हजरत से जुड़े लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके बेटे ने जब से बुजुर्ग की संगति अपनाई है, तब से नमाज की पाबंदी करने लगा है, जिससे उन्हें काफी खुशी मिली है। उन्होंने इसका श्रेय मौलाना मुजीबुर्रहमान की कोशिशों को दिया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सुधारात्मक प्रयासों से कई लोगों की जिंदगी में बदलाव आया है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहना चाहिए।
अंत में डॉक्टर फारूक दिलकश ने दुआ की कि अल्लाह तआला हजरत मौलाना महमूदुल हसन ग्रौलवी से जुड़े तमाम लोगों को लंबे समय तक उनकी संगति और नेक रास्ते पर कायम रखे तथा मदरसा नुमानिया रियाजुल उलूम को दिन-प्रतिदिन तरक्की प्रदान करे।
