Monday, June 15, 2026
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मधुबनी रेलवे स्टेशन की ‘बादाम वाली छांव’ हुई खत्म, यात्रियों में नाराजगी; दशकों पुरानी पहचान पर चली आरी

मधुबनी, प्रतिनिधि। मधुबनी रेलवे स्टेशन की पहचान माने जाने वाले बादाम के पेड़ अब इतिहास बन गए हैं। वर्षों से स्टेशन परिसर में यात्रियों को छांव देने वाले इन हरे-भरे पेड़ों को रेलवे द्वारा काट दिए जाने के बाद स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों में मायूसी और नाराजगी देखी जा रही है। स्टेशन आने-जाने वाले लोगों का कहना है कि इन पेड़ों से सिर्फ हरियाली ही नहीं, बल्कि स्टेशन की एक अलग पहचान भी जुड़ी हुई थी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले तक प्लेटफॉर्म संख्या-2 और 3 के आसपास स्थित बादाम के पेड़ फल और पत्तों से लदे हुए थे। गर्मी के दिनों में इनकी घनी छांव यात्रियों के लिए किसी राहत से कम नहीं थी। ट्रेन का इंतजार कर रहे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अक्सर इन्हीं पेड़ों के नीचे समय बिताते थे। लेकिन अचानक पेड़ों की कटाई होने से स्टेशन का स्वरूप ही बदल गया है।
यात्रियों की जुड़ी थीं भावनाएंl

स्टेशन पर मौजूद कई यात्रियों ने बताया कि बादाम के फल भले ही आम लोगों तक कम पहुंचते थे, लेकिन इन पेड़ों की छांव सभी के लिए थी। एक यात्री ने कहा, “फल तो कभी नसीब नहीं हुआ, लेकिन पेड़ों की छांव हमारी अपनी थी। तेज धूप में यही सबसे बड़ा सहारा हुआ करते थे।”

वहीं एक बुजुर्ग यात्री ने कहा कि वर्षों से स्टेशन पर आते-जाते हुए उन्होंने इन पेड़ों को बढ़ते देखा था। अब जब वे नहीं रहे, तो स्टेशन कुछ सूना-सूना लगने लगा है।

गर्मी में यात्रियों को मिलती थी राहत
मधुबनी जैसे इलाके में जहां गर्मी के दिनों में तापमान लगातार बढ़ रहा है, वहां बड़े और घने पेड़ यात्रियों के लिए प्राकृतिक राहत का काम करते थे। प्लेटफॉर्म पर ट्रेन की प्रतीक्षा करने वाले लोग अक्सर इन्हीं पेड़ों की छांव में बैठकर धूप से बचते थे। पेड़ों के कट जाने के बाद अब यात्रियों को खुले आसमान के नीचे इंतजार करना पड़ रहा है।
रेलवे की ओर से नहीं आया कोई आधिकारिक बयान
पेड़ों की कटाई को लेकर रेलवे प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि स्टेशन के विकास, सुरक्षा व्यवस्था या किसी निर्माण कार्य के कारण पेड़ों को हटाया गया हो सकता है। हालांकि वास्तविक कारण को लेकर रेलवे ने सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

लोगों ने उठाए सवाल
पेड़ों की कटाई के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर फलदार और हरे-भरे पेड़ों को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? यदि स्टेशन के विकास के लिए पेड़ काटे गए हैं तो क्या उनकी भरपाई के लिए नए पौधे लगाए जाएंगे? इन सवालों का जवाब लोग रेलवे प्रशासन से चाहते हैं।

स्टेशन ने खोई अपनी एक पहचान
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मधुबनी रेलवे स्टेशन की पहचान सिर्फ भवन और प्लेटफॉर्म से नहीं, बल्कि उन बादाम के पेड़ों से भी थी जो वर्षों से यहां मौजूद थे। पेड़ों की कटाई के बाद अब वहां सिर्फ कटे हुए तनों के निशान और बुरादा बचा है। लोगों का मानना है कि स्टेशन ने अपनी एक पुरानी और भावनात्मक पहचान खो दी है।
फिलहाल यात्रियों के बीच एक ही चर्चा है— यदि परेशानी फलों से थी तो समझ आता, लेकिन आखिर छांव से दुश्मनी क्यों?

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