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ऐतिहासिक धरोहर बलिराजगढ़ में फिर शुरू हुआ उत्खनन, मिथिला के प्राचीन इतिहास से उठेगा पर्दा

मधुबनी, 28 मार्च 2026:

मिथिला क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले बलिराजगढ़ में एक बार फिर उत्खनन कार्य का विधिवत शुभारंभ हो गया है। वर्षों से रुकी यह प्रक्रिया अब नए उत्साह और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ शुरू की गई है, जिससे क्षेत्र के प्राचीन इतिहास के कई अनछुए पहलुओं के सामने आने की उम्मीद है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा इस उत्खनन कार्य को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। जानकारी के अनुसार, यह कार्य करीब एक दशक से अधिक समय बाद दोबारा शुरू हुआ है, जिसे ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। �

क्या है बलिराजगढ़ की ऐतिहासिक खासियत?

बलिराजगढ़, मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड में स्थित एक प्राचीन किले का अवशेष है, जिसे मिथिला सभ्यता के प्रमुख केंद्रों में से एक माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार यह स्थल संभवतः प्राचीन विदेह (मिथिला) राज्य की राजधानी रहा होगा।

यह स्थल लगभग 200 ईसा पूर्व या उससे भी पहले का माना जाता है और यहां से कई प्राचीन सभ्यताओं के प्रमाण मिले हैं।

उत्खनन से क्या मिल सकता है?

पूर्व में किए गए उत्खननों में यहां से विभिन्न कालखंडों —

.शुंग

कुषाण

गुप्त

पाल काल

के अवशेष और पुरातात्विक सामग्री प्राप्त हो चुकी है।

नई खुदाई से उम्मीद जताई जा रही है कि:

प्राचीन मिथिला सभ्यता के और ठोस प्रमाण मिल किले की संरचना और विस्तार की स्पष्ट जानकारी मिलेगीl ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में मदद मिलेगी

उद्घाटन और पहल

इस महत्वपूर्ण उत्खनन कार्य का उद्घाटन राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा द्वारा किया गया, जिन्होंने इसे फिर से शुरू कराने में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि यह पहल मिथिला की समृद्ध विरासत को उजागर करने में मील का पत्थर साबित होगी और इससे क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।

पहले भी हो चुका है उत्खनन

बलिराजगढ़ में पहले भी कई चरणों में खुदाई की जा चुकी है (1962 से 2014 के बीच), जिसमें पांच अलग-अलग सांस्कृतिक कालखंडों के प्रमाण सामने आए थे।लेकिन बीच में यह कार्य रुक गया था, जिसके कारण कई महत्वपूर्ण रहस्य अब तक जमीन के नीचे ही दबे रह गए थे।

पर्यटन और विकास की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस स्थल का समुचित विकास किया जाए, तो यह मिथिला क्षेत्र का एक बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा

क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी

बिहार की ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी

✍️ निष्कर्ष

बलिराजगढ़ में उत्खनन कार्य का पुनः शुरू होना केवल एक पुरातात्विक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मिथिला की हजारों साल पुरानी सभ्यता को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में यह खुदाई न सिर्फ इतिहास के कई रहस्यों से पर्दा उठाएगी, बल्कि इस क्षेत्र को नई पहचान भी दिलाएगी।

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