मिथिला की परंपरा बचाने मैदान में उतरीं 350 छात्राएं सामा-चकेवा के गीतों से गूंज उठा मधुबनी का स्कूल
अब घर-घर पहुंचेगी सामा-चकेवा की संस्कृति, नवंबर में पहली बार परिवारों के साथ होगा भव्य सामूहिक महाउत्सव
मधुबनी: मोबाइल और आधुनिकता के दौर में कहीं मिथिला की सदियों पुरानी लोकपरंपराएं नई पीढ़ी से दूर न हो जाएं, इसी चिंता के बीच मधुबनी से एक शानदार पहल सामने आई है। यहां 350 छात्राओं ने न सिर्फ सामा-चकेवा पर्व के बारे में जाना, बल्कि पारंपरिक लोकगीत गाकर और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेकर अपनी मिट्टी की विरासत को करीब से महसूस भी किया।
जिवछ चौक स्थित रीजनल सेकेंडरी स्कूल में आयोजित इस विशेष कार्यशाला में कक्षा आठवीं और नौवीं की करीब 350 छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। झाश्री प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद मिथिला की पहचान माने जाने वाले सामा-चकेवा पर्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और इसके संरक्षण के लिए बच्चों को प्रेरित करना था।
लोकगीतों से गूंज उठा स्कूल, छात्राओं ने जाना सामा-चकेवा का महत्व
कार्यशाला में छात्राओं को सामा-चकेवा से जुड़ी लोककथाओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों और पारंपरिक गीतों की जानकारी दी गई। ग्राम मंगरौनी से पहुंचीं लोकपरंपरा की जानकार रीता देवी, पुनीता देवी, अंजलि देवी, सोनी देवी, राम दुलारी देवी, ओम प्रकाश कुमार पंडित एवं नारायण कुमार पंडित ने अपने अनुभव साझा किए और छात्राओं को इस पर्व की खासियत बताई।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक पल तब रहा, जब छात्राओं ने शिक्षकों के मार्गदर्शन में सामूहिक रूप से सामा-चकेवा के पारंपरिक लोकगीत गाए। लोकगीतों की गूंज के बीच पूरा माहौल मिथिला की संस्कृति और परंपरा के रंग में रंग गया।
सिर्फ कार्यशाला नहीं, अब परिवारों को जोड़ने की भी तैयारी!
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि आयोजन यहीं समाप्त नहीं होने वाला है। आयोजकों ने नवंबर महीने में सामा-चकेवा महाउत्सव आयोजित करने की तैयारी की है। इसमें पहली बार परिवारों को एक साझा मंच पर लाकर सामूहिक रूप से यह लोकपर्व मनाने की योजना है।
इस दौरान परिवार के सदस्य एक साथ पारंपरिक विधियों, लोकगीतों और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होंगे। आयोजकों का मानना है कि जब बच्चे अपने परिवार के साथ लोकपर्व मनाएंगे, तभी यह परंपरा अगली पीढ़ियों तक मजबूती से पहुंचेगी।
विद्यालय के इन अधिकारियों की रही मौजूदगी
कार्यशाला में विद्यालय के निदेशक Dr. Ram Sringar Pandey, प्राचार्य मनोज कुमार झा, अकादमिक निदेशक इंजीनियर प्रत्युष परिमल एवं उपप्राचार्य पवन कुमार तिवारी मौजूद रहे। सभी ने इस सांस्कृतिक पहल की सराहना की।
झा श्री प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक आयुष वत्स के नेतृत्व में टीम के सदस्य अनुभव आनंद, सौरभ नारायण एवं अन्य सहयोगियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मिट्टी से जुड़ेंगी नई पीढ़ियां, तभी बचेगी मिथिला की पहचान
आज जब नई पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में सामा-चकेवा जैसी लोकपरंपराओं को फिर से जीवंत करने की यह पहल खास मायने रखती है। 350 छात्राओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया है कि मिथिला की संस्कृति आज भी नई पीढ़ी के दिलों में जगह बना सकती है।
अब सबकी निगाहें नवंबर में होने वाले सामा-चकेवा महाउत्सव पर टिकी हैं, जहां स्कूल की कार्यशाला से शुरू हुई यह पहल परिवारों और समाज तक पहुंचेगी।
