Tuesday, October 27, 2026
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मधुबनी में ₹30 हजार रिश्वत लेते ट्रैफिक DSP सुजीत कुमार गिरफ्तार, SSP योगेंद्र कुमार ने की पुष्टि; कार्रवाई के बाद बिगड़ी तबीयत

BIHAR NEWS: निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई से पुलिस महकमे में हलचल, शिकायत के सत्यापन के बाद पटना से पहुंची थी टीम

मधुबनी। बिहार के मधुबनी जिले से भ्रष्टाचार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। जिले के ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार को ₹30,000 रिश्वत लेने के आरोप में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। मामले में मधुबनी के SSP योगेंद्र कुमार ने भी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। कार्रवाई के बाद डीएसपी की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है, जिसके बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाए जाने की सूचना है।

₹30 हजार रिश्वत लेते पकड़े गए ट्रैफिक DSP
मिली जानकारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद पटना से निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम मधुबनी पहुंची थी। शिकायत का सत्यापन करने के बाद टीम ने कथित तौर पर जाल बिछाया। इसी कार्रवाई के दौरान ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार को ₹30 हजार रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा गया।

इस कार्रवाई को लेकर पुलिस और प्रशासनिक महकमे में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, रिश्वत किस काम के बदले मांगी गई थी और शिकायतकर्ता कौन है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

SSP योगेंद्र कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि की
इस मामले में मधुबनी के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) योगेंद्र कुमार ने भी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की पुष्टि के बाद मामले ने और गंभीरता हासिल कर ली है। निगरानी विभाग की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर अब विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

कार्रवाई के बाद बिगड़ी तबीयत, अस्पताल ले जाने की सूचना
रिपोर्ट के मुताबिक, निगरानी टीम की कार्रवाई के बाद ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाए जाने की सूचना है।

उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, इलाज और चिकित्सकीय जांच से संबंधित विस्तृत जानकारी की पुष्टि होना बाकी है।
निगरानी विभाग की कार्रवाई से पुलिस महकमे में हलचल
सरकारी अधिकारी के खिलाफ रिश्वत लेने के आरोप में हुई यह कार्रवाई भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में निगरानी विभाग की भूमिका को फिर चर्चा में ले आई है। अब सबकी नजर मामले में आधिकारिक विवरण, कथित रिश्वत की बरामदगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर रहेगी।

जांच में आरोपों की पुष्टि संबंधित साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी। मामले में आगे जो भी आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, उससे पूरे घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट होगी।

 

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