अंजुमन इत्तेहादे मिल्लत के नेतृत्व में निकला जुलूस, नबी-ए-पाक ﷺ की सीरत और शिक्षाओं को अपनाने की अपील
मधुबनी। जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ के मुबारक मौके पर बुधवार को मधुबनी शहर में अंजुमन इत्तेहादे मिल्लत, बड़ा बाजार के बैनर तले भव्य जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जुलूस के जरिए शहरवासियों तक अमन, शांति, मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम पहुंचाया गया।
जुलूस का आयोजन 26 अगस्त 2026 को सुबह करीब 9 बजे सूरी हाई स्कूल के मैदान से किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जुलूस के दौरान नबी-ए-पाक हजरत मोहम्मद ﷺ की सीरत और उनकी शिक्षाओं को याद करते हुए समाज में शांति और आपसी सद्भाव कायम रखने का संदेश दिया गया।
‘इस्लाम का पैगाम अमन और इंसानियत’
अंजुमन इत्तेहादे मिल्लत की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि इस्लाम पूरी दुनिया को अमन और शांति का पैगाम देता है। पैगंबर हजरत मोहम्मद ﷺ ने अपनी पूरी जिंदगी इंसानियत, रहम, मोहब्बत, न्याय और भाईचारे की शिक्षा दी।
कार्यक्रम में मौजूद उलेमा और धार्मिक विद्वानों ने कहा कि आज के दौर में पैगंबर ﷺ की शिक्षाओं को समझना और उन्हें अपने जीवन में उतारना बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से कहा कि अपने पड़ोसी, रिश्तेदार और समाज के हर व्यक्ति के साथ मोहब्बत और सम्मान का व्यवहार करें।
नशा, दहेज और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ उठी आवाजl
जुलूस के दौरान सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी लोगों को जागरूक किया गया। वक्ताओं ने नशाखोरी, दहेज प्रथा और समाज में फैल रही अन्य बुराइयों को खत्म करने की अपील की। खासकर युवाओं से नशे से दूर रहने और शिक्षा एवं सकारात्मक कार्यों से जुड़ने का आह्वान किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर-ए-पाक ﷺ की सीरत केवल धार्मिक जीवन का मार्गदर्शन नहीं करती, बल्कि इंसान को एक बेहतर इंसान बनने की सीख भी देती है।
दुनिया में अमन-शांति के लिए मांगी गई दुआ
जुलूस के दौरान देश और दुनिया में अमन-शांति, खुशहाली, आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता के लिए दुआ की गई। आयोजकों ने कहा कि जश्न-ए-मोहम्मदी का असली मकसद सिर्फ खुशी मनाना नहीं, बल्कि नबी-ए-पाक ﷺ की शिक्षाओं को याद करना और उनके पैगाम को समाज तक पहुंचाना है।
अंजुमन इत्तेहादे मिल्लत ने लोगों से अपील की कि नफरत को छोड़कर मोहब्बत अपनाएं, एक-दूसरे का सम्मान करें और समाज में अमन एवं भाईचारे को मजबूत करें।
अंजुमन का स्पष्ट संदेश
“मोहब्बत बांटिए, नफरत मिटाइए और इंसानियत को मजबूत बनाइए—यही पैगंबर-ए-पाक ﷺ की शिक्षाओं का मूल संदेश है।”
जुलूस-ए-मोहम्मदी के माध्यम से मधुबनी से एक बार फिर अमन, भाईचारे और इंसानियत का मजबूत संदेश सामने आया।
