पटना। बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। मौजूदा पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म होने वाला है। ऐसे में अगले पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर परिसीमन से लेकर आरक्षण तक की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होने जा रही है।
️ पहले तय होगी पंचायतों की नई सीमा
आगामी चुनाव से पहले पंचायत क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण यानी परिसीमन कराया जाएगा। राज्य स्तर पर इसके लिए नियम और दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे, जबकि जिलों में इन्हीं नियमों के आधार पर पंचायतों की सीमाएं निर्धारित की जाएंगी।
परिसीमन के बाद कई पंचायतों का क्षेत्र बदल सकता है। कहीं नई पंचायत का गठन हो सकता है तो कहीं पंचायतों की सीमाओं में बदलाव देखने को मिल सकता है।
परिसीमन के बाद बदलेगा आरक्षण का पूरा गणित!
सबसे बड़ा बदलाव परिसीमन के बाद तैयार होने वाले नए आरक्षण रोस्टर में देखने को मिल सकता है। ग्राम पंचायत से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद के अलग-अलग पदों के लिए SC, ST, EBC और महिलाओं के आरक्षण का निर्धारण नए सिरे से किया जाएगा।
इसका सीधा असर संभावित प्रत्याशियों पर पड़ेगा। जिस सीट पर पिछली बार चुनाव हुआ था, जरूरी नहीं कि अगली बार भी वही सीट उसी वर्ग के लिए आरक्षित रहे। आरक्षण बदलने पर कई उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति भी बदल सकती है।
⏳ 2026 में कार्यकाल खत्म, 2027 में चुनाव की संभावना
बिहार में पिछला पंचायत चुनाव 2021 में सितंबर से दिसंबर के बीच हुआ था। अब मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में समाप्त होने जा रहा है।
नई पंचायत व्यवस्था के लिए परिसीमन, आरक्षण, मतदाता सूची और मतदान केंद्रों के निर्धारण जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसी वजह से 2027 में पंचायत चुनाव होने की संभावना बन रही है।
संभावित प्रत्याशियों की बढ़ी बेचैनी
परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होते ही गांव-गांव में संभावित प्रत्याशियों की नजर अब नई सीटों के समीकरण पर टिक गई है। किस पंचायत की सीमा बदलेगी, कौन-सी सीट सामान्य रहेगी और किस सीट पर आरक्षण लागू होगा—इन सवालों का जवाब नई अधिसूचनाओं के बाद ही साफ होगा।
यानी बिहार पंचायत चुनाव 2027 से पहले गांवों की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब नजर परिसीमन और नए आरक्षण रोस्टर की घोषणा पर है।
