पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत और भाजपा की अप्रत्याशित हार के बाद बिहार की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता डॉ. शकील अहमद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए चुनाव परिणामों का विस्तृत राजनीतिक विश्लेषण किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस उपचुनाव की सबसे बड़ी खबर प्रशांत किशोर की जीत है या भाजपा की हार?
डॉ. शकील अहमद ने अपने विश्लेषण में कहा कि नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तत्कालीन उम्मीदवार और वर्तमान भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने करीब 98 हजार वोट प्राप्त कर 51 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में राजद उम्मीदवार को लगभग 46 हजार वोट मिले थे, जबकि प्रशांत किशोर की पार्टी के उम्मीदवार को करीब 7 हजार वोट ही मिल सके थे। लेकिन महज आठ महीने बाद हुए उपचुनाव में राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई और जन सुराज के उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया।
उन्होंने लिखा कि इतने कम समय में मतदाताओं का रुझान पूरी तरह बदल जाना सामान्य राजनीतिक घटना नहीं है। इसके पीछे कई सामाजिक और राजनीतिक कारण रहे, जिन्हें समझने की जरूरत है।
भाजपा की हार के पीछे बताए 5 प्रमुख कारण
डॉ. शकील अहमद के अनुसार पहला बड़ा कारण भरत भूषण तिवारी की कथित फर्जी मुठभेड़ का मामला रहा। उनका दावा है कि इस घटना के बाद सरकार की कार्यशैली को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ी। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में जनता का भरोसा पूरी तरह नहीं जीत सकी, जबकि प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इससे सरकार विरोधी माहौल मजबूत हुआ।
दूसरे कारण के रूप में उन्होंने Gen Z आंदोलन और युवाओं की नाराजगी का जिक्र किया। उनके अनुसार हाल के महीनों में युवाओं के आंदोलनों और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई का असर चुनाव पर भी दिखाई दिया। उनका मानना है कि बड़ी संख्या में युवाओं ने भाजपा के खिलाफ मतदान किया।
तीसरे कारण के तौर पर डॉ. शकील ने दावा किया कि राजद के पारंपरिक वोटरों का एक हिस्सा भी इस बार प्रशांत किशोर के पक्ष में चला गया। उनके अनुसार कई मतदाताओं को लगा कि राजद उम्मीदवार की जीत की संभावना कम है, इसलिए उन्होंने भाजपा को हराने के उद्देश्य से जन सुराज का समर्थन किया।
चौथा कारण उन्होंने नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद बनी राजनीतिक परिस्थितियों को बताया। उनका कहना है कि जदयू के परंपरागत समर्थकों के एक वर्ग में भाजपा को लेकर असंतोष था, जिसका असर मतदान पर पड़ा।
पांचवें कारण के रूप में उन्होंने भाजपा के स्थानीय गैर-कायस्थ नेताओं और कार्यकर्ताओं की कथित नाराजगी का उल्लेख किया। डॉ. शकील के अनुसार टिकट वितरण को लेकर संगठन के भीतर असंतोष भी चुनावी परिणाम को प्रभावित करने वाला एक कारण हो सकता है।
प्रशांत किशोर को मिला दोनों दलों के मतदाताओं का समर्थन
डॉ. शकील अहमद का दावा है कि इस उपचुनाव में भाजपा और राजद—दोनों के पारंपरिक वोट बैंक का एक हिस्सा प्रशांत किशोर की ओर स्थानांतरित हुआ। उनके अनुसार यही कारण रहा कि जन सुराज के वोटों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई और पार्टी ने बांकीपुर जैसी प्रतिष्ठित सीट पर जीत दर्ज की।
हालांकि, यह पूरा विश्लेषण पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शकील अहमद द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook पर व्यक्त उनके व्यक्तिगत राजनीतिक विचार हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और चुनाव परिणामों के कारणों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की अपनी-अपनी राय है।
