केंद्र और बिहार सरकार के संयुक्त प्रयास से राज्यभर में 14 अगस्त 2026 तक भारत टीबी मुक्त अभियान युद्ध स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
अभियान का उद्देश्य टीबी (यक्ष्मा) की समय पर पहचान, जांच, उपचार और मरीजों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराकर बिहार को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना है। इसके तहत सभी जिलों एवं प्रखंडों में टीबी स्क्रीनिंग, जांच, एक्स-रे, उपचार तथा निश्चय पोषण योजना के लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने का कार्य तेज गति से चल रहा है।
इसी अभियान के तहत मधुबनी जिले के पंडौल प्रखंड में एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। सकरी क्षेत्र की जिला परिषद सदस्य सईदा बानो ने अपने आवास पर टीबी से पीड़ित 10 मरीजों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया और उन्हें पोषण से भरपूर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई। इस पहल का उद्देश्य मरीजों को यह संदेश देना था कि टीबी का इलाज संभव है और उचित दवा के साथ संतुलित पोषण भी स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मरीजों को दिए गए फूड बास्केट में चावल, दाल, सोयाबीन, सरसों का तेल, चना, चूड़ा, अंडा सहित अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री शामिल थी।
यह सहायता मरीजों को उपचार के दौरान बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदान की गई।
सहायता मिलने के बाद मरीजों ने सईदा बानो के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि इस तरह का सहयोग न केवल आर्थिक रूप से सहायक है, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें उपचार जारी रखने के लिए प्रेरित करता है।
इस आयोजन को सफल बनाने में पंडौल प्रखंड के एसटीएस (STS) अनुज कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने सभी 10 टीबी मरीजों को एकत्रित कर कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग दिया। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पंडौल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. खालिद मंजर ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन अभियान तभी सफल होगा जब समाज, जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग मिलकर कार्य करेंगे।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग लगातार मरीजों को नियमित दवा उपलब्ध कराने के साथ-साथ पोषण के महत्व के प्रति भी जागरूक कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी के इलाज में नियमित दवा के साथ पर्याप्त एवं पौष्टिक भोजन अत्यंत आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से सरकार निश्चय पोषण योजना के माध्यम से मरीजों को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है, ताकि उपचार के दौरान उन्हें पोषण संबंधी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
पंडौल में सईदा बानो और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल यह साबित करती है कि यदि जनप्रतिनिधि, समाज और स्वास्थ्यकर्मी मिलकर कार्य करें तो टीबी जैसी गंभीर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर किए जा रहे ऐसे प्रयास न केवल मरीजों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि पूरे समाज को टीबी मुक्त भारत के संकल्प से जोड़ने का भी कार्य करते हैं।
14 अगस्त 2026 तक चलने वाले भारत टीबी मुक्त अभियान के तहत राज्यभर में इसी प्रकार जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि हर मरीज तक समय पर उपचार, पोषण और आवश्यक सहयोग पहुंच सके तथा बिहार टीबी मुक्त बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सके।
